Ticker

6/recent/ticker-posts

स्टे के बावजूद शासकीय भूमि की बिक्री, जिला मुख्यालय में भू-माफियाओं के हौसले बुलंद


कोरिया। जिला मुख्यालय में शासकीय भूमि की अवैध बिक्री का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। ताजा जानकारी के अनुसार राम नवमी के अवसर पर भी शासकीय भूमि की रजिस्ट्री कर दी गई, जबकि उक्त भूमि पर एसडीएम कार्यालय द्वारा पूर्व में ही स्टे लगाया गया है। इसके बावजूद भूमि की खरीद-बिक्री होना प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर रहा है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिस भूमि की रजिस्ट्री 03 मार्च 2026 को की गई है, वह शासकीय श्रेणी में आती है और उस पर वन विभाग के भवन सहित धार्मिक स्थल (मंदिर) भी स्थित है। इतनी स्पष्ट स्थिति के बाद भी रजिस्ट्री प्रक्रिया का पूरा होना यह दर्शाता है कि संबंधित दस्तावेजों की जांच में गंभीर लापरवाही बरती गई है या फिर जानबूझकर नियमों को नजरअंदाज किया गया है। यह मामला केवल एक भूमि तक सीमित नहीं है। जिला मुख्यालय सहित आसपास के क्षेत्रों में भी शासकीय भूमि की अवैध बिक्री लगातार जारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भू-माफियाओं का नेटवर्क इतना सक्रिय हो चुका है कि वे प्रशासनिक आदेशों की भी परवाह नहीं कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर संबंधित विभागों के अधिकारी इस पूरे मामले में मौन बने हुए हैं, जिससे संदेह और गहरा हो रहा है। बैकुण्ठपुर शहर से लगे हल्कों में भी स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार कई पटवारियों पर फर्जी हस्ताक्षर कर शासकीय भूमि का विक्रय कराने के आरोप लग रहे हैं। यदि यह आरोप सही हैं, तो यह न केवल गंभीर अनियमितता है बल्कि पूरे राजस्व तंत्र की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। इस मामले में विशेष जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है। स्थानीय नागरिकों की मांग है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी हो, जिसके लिए जिले के बाहर की प्रशासनिक टीम से जांच कराई जानी चाहिए। ऐसा होने पर ही पूरे प्रकरण में बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है और दोषियों के खिलाफ ठोस कार्यवाही संभव हो सकेगी।

सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि जब किसी भूमि पर विधिवत स्टे आदेश लागू है, तो रजिस्ट्री से पहले क्या दस्तावेजों का सत्यापन नहीं किया गया? क्या रजिस्ट्री कार्यालय को स्टे आदेश की जानकारी नहीं थी, या फिर उसे नजरअंदाज किया गया? यदि ऐसा है तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि शासन की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा करता है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नियम-कानून केवल आम और गरीब लोगों के लिए ही लागू किए जा रहे हैं, जबकि प्रभावशाली भू-माफियाओं के खिलाफ कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो रही है। यदि समय रहते इस पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में और अधिक शासकीय भूमि अवैध कब्जे और बिक्री का शिकार हो सकती है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेकर दोषियों के खिलाफ क्या कार्यवाही करता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ