समय-सीमा बैठक में कलेक्टर ने गुणवत्तापूर्ण कार्य, शिकायतों के गंभीर निराकरण और अधिकारियों की जवाबदेही पर दिया जोर, लेकिन जिले में पूर्व की जांच प्रक्रियाओं पर उठ रहे सवालों ने बढ़ाई चिंता।


बैकुण्ठपुर। कोरिया कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने सोमवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित साप्ताहिक समय-सीमा बैठक में जिले के अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और प्रत्येक शिकायत का समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण एवं संतोषजनक निराकरण सुनिश्चित किया जाए। बैठक में लंबित प्रकरणों, सुशासन तिहार शिविरों, सीएम हेल्पलाइन, राजस्व मामलों तथा विभिन्न विकास योजनाओं की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने अधिकारियों को जवाबदेही के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।

बैठक के दौरान कलेक्टर ने विशेष रूप से कहा कि सीएम हेल्पलाइन, जनदर्शन और अन्य माध्यमों से प्राप्त प्रत्येक शिकायत का गंभीरता से परीक्षण किया जाए तथा केवल औपचारिकता निभाने के बजाय तथ्यात्मक एवं निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने राजस्व विभाग के लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण, किसानों के एग्री-स्टैक पंजीयन में तेजी, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना तथा जल जीवन मिशन के कार्यों की नियमित समीक्षा करते हुए सभी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

प्रत्येक सोमवार अधिकारी रहेंगे कार्यालय में

कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक सोमवार अपने कार्यालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहकर आम नागरिकों की समस्याएं सुनें और उनका समाधान करें। साथ ही विभागीय अभिलेखों एवं आवश्यक दस्तावेजों को व्यवस्थित रखने के भी निर्देश दिए ताकि आम लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। मानसून को देखते हुए उन्होंने नगरीय निकायों में नालियों की नियमित सफाई, ग्रामीण क्षेत्रों में पेड़ गिरने एवं विद्युत आपात स्थितियों से निपटने की तैयारी तथा संभावित बाढ़ की स्थिति को ध्यान में रखते हुए जलाशयों और नहरों का पूर्व निरीक्षण कर आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। बैठक के बाद आयोजित जनदर्शन में शिकायतों एवं मांगों से संबंधित 41 आवेदन प्राप्त हुए, जिन्हें संबंधित विभागों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण के लिए भेजा गया।

आदेशों से बढ़ी उम्मीदें

कलेक्टर द्वारा दिए गए निर्देशों से जिलेवासियों में यह उम्मीद जगी है कि अब शासन-प्रशासन की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचेगा और अधिकारियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी। लंबे समय से विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन और शिकायतों के निराकरण को लेकर उठ रहे सवालों के बीच कलेक्टर के सख्त निर्देशों को प्रशासनिक व्यवस्था सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

तलवापारा पंचायत कार्यालय पर फिर नजर

जिले में लगातार यह मुद्दा उठता रहा है कि जिला मुख्यालय से लगे ग्राम पंचायत तलवापारा का पंचायत भवन अधिकांश समय बंद रहता है। इस संबंध में कई बार समाचार प्रकाशित होने के बाद अब कलेक्टर के निर्देशों के मद्देनजर लोगों की नजर इस पंचायत पर भी टिकी हुई है। जानकारी के अनुसार पंचायत भवन में लगभग 3 लाख 30 हजार रुपये की लागत से मरम्मत कार्य कराया जा रहा है। ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि यदि भवन की मरम्मत पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं तो मरम्मत के बाद पंचायत कार्यालय नियमित रूप से खुलेगा या पहले की तरह बंद ही रहेगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कलेक्टर के निर्देशों का पालन धरातल पर कितना दिखाई देता है।

शिकायतों की जांच पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल

कलेक्टर ने बैठक में शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण एवं निष्पक्ष निराकरण पर विशेष जोर दिया, लेकिन जिले में पूर्व में हुई कई जांच प्रक्रियाओं को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कई मामलों में जांच अधिकारी मौके पर पहुंचे बिना ही शिकायतों का निराकरण कर देते हैं। उनका कहना है कि अनेक मामलों में संबंधित विभागों से आवश्यक प्रतिवेदन तक नहीं लिया जाता और शिकायतों को कागजी कार्रवाई पूरी कर बंद कर दिया जाता है।

जनदर्शन की शिकायतों का दिया जा रहा उदाहरण

शिकायतकर्ताओं ने जनदर्शन में दर्ज शिकायत क्रमांक 2010226000673 का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया है कि अवैध प्लॉटिंग संबंधी शिकायत में जांच अधिकारी ने संबंधित हल्का पटवारी, राजस्व निरीक्षक (आरआई), ग्राम पंचायत अथवा अन्य संबंधित अधिकारियों का प्रतिवेदन लिए बिना ही जांच पूर्ण कर दी। शिकायतकर्ताओं का यह भी दावा है कि जांच प्रतिवेदन में कुछ तथ्यों का उल्लेख वास्तविक स्थिति से अलग किया गया, जिससे शासन को संभावित वित्तीय नुकसान पहुंचा। इसी प्रकार शिकायत क्रमांक 2010226000772, 2010226000260 में भी शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वास्तविक जांच के बजाय पूर्ववत प्रतिवेदन के आधार पर शिकायत का निराकरण कर दिया गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है।

क्या बदलेगी जांच की कार्यप्रणाली?

जिले में यह चर्चा भी है कि वर्ष 2025 के दौरान सुशासन तिहार एवं अन्य माध्यमों से प्राप्त कई शिकायतों का निराकरण केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रह गया। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि अनेक मामलों में जांच अधिकारी मौके पर पहुंचे ही नहीं, फिर भी शिकायतों को बंद कर दिया गया। ऐसे में अब कलेक्टर रोक्तिमा यादव द्वारा 7 जुलाई 2026 को दिए गए निर्देशों के बाद लोगों की निगाह इस बात पर टिकी है कि क्या जांच की प्रक्रिया वास्तव में पारदर्शी, तथ्यात्मक और निष्पक्ष होगी या फिर पहले की तरह केवल औपचारिक जांच कर शिकायतों को नस्तीबद्ध कर दिया जाएगा।

जिलेवासियों की उम्मीदें बढ़ीं

कलेक्टर के स्पष्ट निर्देशों के बाद आम नागरिकों की अपेक्षा है कि अब शिकायतों के निराकरण में केवल कार्यालयीन औपचारिकताएं नहीं, बल्कि वास्तविक तथ्यों और जमीनी स्थिति को प्राथमिकता दी जाएगी। यदि अधिकारी शिकायत स्थल पर पहुंचकर संबंधित पक्षों के बयान, विभागीय अभिलेख और स्थानीय परिस्थितियों का परीक्षण करेंगे तो शिकायतों का निष्पक्ष समाधान संभव हो सकेगा।

अब आदेशों के पालन की होगी असली परीक्षा

कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता पर स्पष्ट संदेश दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिले के अधिकारी इन निर्देशों का अक्षरशः पालन करेंगे या फिर पूर्व की तरह कार्यशैली जारी रहेगी। यदि शिकायतों की निष्पक्ष जांच, योजनाओं का गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन और अधिकारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित होती है तो निश्चित रूप से जिले में सुशासन की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।