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मुख्य लिपिक की भूमिका, बिना जीएसटी बिल खरीदी, लंबित भर्ती और वाहन उपयोग के दावों ने बढ़ाई पारदर्शिता की मांग

बैकुण्ठपुर परियोजना कार्यालय पर उठ रहे गंभीर सवाल, भर्ती से लेकर पोषण आहार और खरीदी प्रक्रिया तक विवादों में महिला एवं बाल विकास विभाग


बैकुण्ठपुर। कोरिया जिले के महिला एवं बाल विकास विभाग का बैकुण्ठपुर परियोजना कार्यालय इन दिनों विभिन्न प्रशासनिक और वित्तीय मामलों को लेकर चर्चा में है। कार्यालय की कार्यप्रणाली, खरीदी प्रक्रिया, आंगनबाड़ी भर्ती, पोषण आहार वितरण और शासकीय वाहन के उपयोग को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों पर विभाग की ओर से अब तक कोई विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

स्थानीय स्तर पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि बैकुण्ठपुर परियोजना कार्यालय में प्रशासनिक व्यवस्था अपेक्षित पारदर्शिता के अनुरूप संचालित नहीं हो रही है। आरोपों के अनुसार परियोजना अधिकारी पहले बैकुण्ठपुर क्षेत्र में पर्यवेक्षक के रूप में कार्य कर चुकी हैं, जिसके कारण उन्हें स्थानीय व्यवस्थाओं की अच्छी जानकारी है। इसी पृष्ठभूमि में कार्यालय की कार्यशैली को लेकर विभिन्न प्रकार की शिकायतें सामने आ रही हैं।

मुख्य लिपिक की भूमिका पर भी उठे प्रश्न

कार्यालय के मुख्य लिपिक श्री पन्ना की भूमिका को लेकर भी चर्चा है। आरोप है कि वे सामान्य कार्यालयीन दायित्वों के अतिरिक्त अधिकांश समय परियोजना अधिकारी के साथ विभिन्न बैठकों, दौरे एवं अन्य कार्यक्रमों में रहते हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जिला कार्यालय, साप्ताहिक समय-सीमा बैठक, जनप्रतिनिधियों से मुलाकात अथवा फील्ड भ्रमण के दौरान भी उनकी उपस्थिति परियोजना अधिकारी के साथ रहती है, जिससे नियमित कार्यालयीन कार्य प्रभावित होने की आशंका रहती है।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की खरीदी प्रक्रिया पर सवाल

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत सामग्री खरीदी को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि खरीदी में बिना जीएसटी वाले बिलों का उपयोग किया गया। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो इससे शासकीय वित्तीय नियमों के पालन पर प्रश्नचिह्न लग सकते हैं। लोगों का कहना है कि आम नागरिकों और व्यापारियों पर कर नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाता है, ऐसे में शासकीय विभागों में भी समान पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए।

आंगनबाड़ी भर्ती प्रक्रिया भी विवादों में

बैकुण्ठपुर परियोजना अंतर्गत हाल ही में निकली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका भर्ती प्रक्रिया भी फिलहाल अटकी हुई बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार चयन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर की समिति द्वारा अनुमोदन पर हस्ताक्षर नहीं किए गए हैं। आरोप है कि समिति के सदस्यों तक भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं संबंधी शिकायतें पहुंची हैं, जिसके कारण अंतिम स्वीकृति लंबित है। इससे चयनित अभ्यर्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पोषण आहार वितरण और वाहन संचालन पर भी सवाल

परियोजना कार्यालय के माध्यम से आंगनबाड़ियों में वितरित किए जाने वाले रेडी-टू-ईट एवं अन्य पोषण आहार की गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था को लेकर भी समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। इसके अलावा सूचना के अधिकार (आरटीआई) से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर यह भी दावा किया गया है कि वास्तविक वाहन संचालन और दर्ज किए गए किलोमीटर में अंतर है। शिकायतकर्ता का कहना है कि जहां वास्तविक दूरी एक से तीन किलोमीटर के बीच है, वहीं अभिलेखों में अधिक दूरी दर्शाई गई है। इन सभी मामलों को लेकर स्थानीय लोगों ने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।

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