बैकुण्ठपुर। जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर में संचालित महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यालय परियोजना अधिकारी को लेकर इन दिनों कई तरह की चर्चाएं और शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला मुख्यालय में स्थित यह कार्यालय ऐसे मामलों को लेकर सुर्खियों में है, जिन पर अब तक स्पष्ट कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार परियोजना अधिकारी कार्यालय देर रात तक संचालित होता देखा जाता है। बताया जा रहा है कि कई अवसरों पर कार्यालय रात लगभग 10 बजे तक खुला रहता है। शासकीय कार्यालयों के निर्धारित समय के बाद भी गतिविधियां जारी रहने को लेकर लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। इधर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं की जांच और कार्रवाई अपेक्षित स्तर पर नहीं हुई। कई मामलों में शिकायतें संबंधित अधिकारियों तक पहुंचने के बावजूद ठोस परिणाम सामने नहीं आने से आवेदकों में असंतोष देखा जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। विभागीय गतिविधियों को लेकर जनप्रतिनिधियों के बीच भी नाराजगी की चर्चा है। सूत्रों का कहना है कि जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर के उपाध्यक्ष भी कुछ मामलों को लेकर असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है, लेकिन विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। एक अन्य मामला शासकीय वाहन के उपयोग से जुड़ा हुआ है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि परियोजना अधिकारी द्वारा अवकाश एवं छुट्टी के दिनों में भी शासकीय वाहन का उपयोग किया जा रहा है। यदि ऐसा है तो यह जांच का विषय हो सकता है कि वाहन का उपयोग शासकीय कार्य के लिए किया गया या निजी प्रयोजनों के लिए। नियमों के अनुसार शासकीय संसाधनों का उपयोग निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप ही किया जाना चाहिए। इसके अलावा परियोजना अधिकारी की पदस्थापना को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि अधिकारी को उनके गृह क्षेत्र में पदोन्नति के बाद पदस्थ किया गया है, जबकि सामान्यतः प्रशासनिक व्यवस्था में हितों के टकराव से बचने के लिए ऐसे मामलों में विशेष सावधानी बरती जाती है। हालांकि वास्तविक स्थिति क्या है, यह विभागीय अभिलेखों और शासन के आदेशों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिला मुख्यालय में स्थित कार्यालय से संबंधित शिकायतों के बावजूद अब तक कोई बड़ी जांच या कार्रवाई सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। इससे लोगों के बीच यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि आखिर शिकायतों पर अपेक्षित गंभीरता क्यों नहीं दिखाई जा रही है।
अब आवश्यकता इस बात की है कि महिला एवं बाल विकास विभाग तथा जिला प्रशासन इन सभी आरोपों और शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराए तथा तथ्य सार्वजनिक करे, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों का जवाब मिल सके। जिला मुख्यालय में यदि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होती है, तो आम लोगों का प्रशासनिक व्यवस्था पर विश्वास प्रभावित होना स्वाभाविक है।

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