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न्यायधानी बिलासपुर में नियमों की उड़ती धज्जियां! रात 2 बजे तक बार बालाओं का नाच-गाना, शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं शराब, संगीत और भीड़ के बीच सवालों के घेरे में प्रशासनिक व्यवस्था




बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी कहलाने वाली बिलासपुर इन दिनों एक ऐसे मामले को लेकर चर्चा में है, जिसने कानून व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के एक चर्चित क्लब एवं बार में देर रात तक कथित रूप से बार बालाओं के नृत्य, शराब परोसने और क्षमता से अधिक भीड़ जुटाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित प्रतिष्ठान में रात 2 बजे तक कार्यक्रम संचालित किए गए, जबकि इस संबंध में कई बार शिकायतें भी की गईं। इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।

रात 2 बजे तक चलता रहा कार्यक्रम

जानकारी के अनुसार, शहर के एक प्रमुख क्लब में देर रात तक डीजे, नृत्य और मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित किए गए। आरोप है कि कार्यक्रम में बाहरी राज्यों से युवतियों को बुलाकर प्रस्तुति कराई गई और बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी रही। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार्यक्रम रात के निर्धारित समय से काफी आगे तक चलता रहा और देर रात लगभग 2 बजे तक गतिविधियां जारी थीं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि किसी प्रतिष्ठान को निर्धारित समय तक ही संचालन की अनुमति है, तो फिर देर रात तक कार्यक्रम कैसे चलता रहा और इसकी निगरानी किस स्तर पर की गई, यह जांच का विषय है।

क्षमता से अधिक भीड़ जुटाने का आरोप

मामले में एक अन्य गंभीर आरोप यह भी है कि क्लब परिसर में निर्धारित क्षमता से अधिक लोगों को प्रवेश दिया गया। बताया जा रहा है कि प्रवेश के लिए शुल्क 2500 रुपये भी लिया गया। बड़ी संख्या में युवाओं की उपस्थिति के कारण सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्था को लेकर भी प्रश्न उठ रहे हैं। वरिष्ठो का मानना है कि किसी भी सार्वजनिक आयोजन स्थल में निर्धारित क्षमता से अधिक भीड़ होने पर दुर्घटना, भगदड़ या अन्य अप्रिय घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में संबंधित विभागों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है।

पहले दी गई थी सूचना, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई

स्थानीय लोगों का दावा है कि संबंधित बार एवं क्लब में देर रात तक शराब परोसे जाने और कार्यक्रम संचालित होने की जानकारी पहले ही दूरभाष के माध्यम से पुलिस विभाग तथा आबकारी विभाग के अधिकारियों को दी गई थी। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्हें बताया गया था कि प्रतिष्ठान निर्धारित समय सीमा से आगे तक संचालित हो रहा है और रात 2 बजे तक शराब परोसी जा रही है। इसके बावजूद मौके पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी है। नागरिकों का कहना है कि यदि संबंधित विभागों को पहले से जानकारी थी, तो नियमों के कथित उल्लंघन को रोकने के लिए तत्काल कदम क्यों नहीं उठाए गए।

लाइसेंस शर्तों के पालन पर उठे सवाल

आबकारी नियमों और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के अनुसार बार, क्लब और शराब परोसने वाले प्रतिष्ठानों को निर्धारित शर्तों का पालन करना होता है। समय सीमा, सुरक्षा व्यवस्था, लाइसेंस की शर्तें और कानून व्यवस्था बनाए रखना अनिवार्य होता है। यदि किसी प्रतिष्ठान द्वारा इन नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो संबंधित विभाग के पास नोटिस जारी करने, जुर्माना लगाने अथवा लाइसेंस निलंबित करने जैसी कार्रवाई का अधिकार होता है। ऐसे में नागरिकों का सवाल है कि यदि लगातार शिकायतें मिल रही थीं, तो संबंधित विभागों द्वारा अब तक क्या कदम उठाए गए।

कर्मचारी का दावा लजकिन कथित पुष्टी नही

मामले को लेकर एक कथित कर्मचारी ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर कुछ गंभीर आरोप लगाए हैं। कर्मचारी का दावा है कि प्रतिष्ठान के संबंध में होने वाली शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होती। उसने यह भी आरोप लगाया कि बड़े आयोजनों के दौरान प्रभावशाली लोगों को विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित विभागों अथवा अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए इन दावों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज

मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई लोगों ने कानून व्यवस्था और प्रशासनिक सक्रियता पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है। कुछ नागरिकों का कहना है कि जब सामान्य लोगों के छोटे-छोटे मामलों में तुरंत कार्रवाई हो जाती है, तो फिर सार्वजनिक रूप से संचालित बड़े आयोजनों में नियमों के कथित उल्लंघन पर सख्ती क्यों नहीं दिखाई जाती।

जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी जताई चिंता

शहर के कुछ सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने भी इस प्रकार के आयोजनों पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि न्यायधानी की पहचान कानून और व्यवस्था से जुड़ी हुई है। ऐसे में यदि नियमों के विपरीत गतिविधियां संचालित होने के आरोप लगते हैं, तो प्रशासन को पारदर्शी जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखनी चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो संबंधित प्रतिष्ठान के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी संस्था नियमों की अनदेखी करने का साहस न कर सके।

निष्पक्ष जांच की मांग तेज

लगातार उठ रहे सवालों के बीच अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ रही है। लोगों का कहना है कि कार्यक्रम की अनुमति, समय सीमा, प्रवेश व्यवस्था, शराब परोसने की वैधता, सुरक्षा मानकों तथा पुलिस, आबकारी और प्रशासनिक निगरानी की भूमिका की विस्तृत जांच की जानी चाहिए। साथ ही यह भी जांच होनी चाहिए कि शिकायतों के बाद संबंधित अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की, मौके पर निरीक्षण किया गया या नहीं, और यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो उसके विरुद्ध क्या कदम उठाए गए। न्यायधानी बिलासपुर में देर रात तक क्लब संचालन और कथित नियम उल्लंघन के आरोपों ने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। पुलिस और आबकारी विभाग को पूर्व में सूचना दिए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने के आरोपों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को भी सवालों के घेरे में ला दिया है। अब आवश्यक है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए, और यदि आरोप निराधार हों तो प्रशासन तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करे, ताकि जनता के बीच बनी शंकाओं का समाधान हो सके।

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