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झुमका बांध में नियमों को ताक पर रखकर बोट संचालन का आरोप, पार्किंग शुल्क में मनमानी वसूली से भी पर्यटक परेशान

 



3 जून को ठेका निरस्त होने के बाद भी संचालन पर उठे सवाल, बारिश और तेज हवाओं के बीच क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने का आरोप


बैकुण्ठपुर। कोरिया जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल झुमका बांध में पार्किंग शुल्क की कथित मनमानी वसूली के साथ-साथ हाउस बोट/क्रूज बोट के संचालन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों और पर्यटकों के अनुसार 15 अगस्त को बारिश और तेज हवाओं के बावजूद बोट का संचालन किया गया। वहीं बोट की निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को सवार किए जाने का आरोप भी सामने आया है। इन शिकायतों ने झुमका बांध में पर्यटन गतिविधियों के संचालन, सुरक्षा व्यवस्था और ठेका प्रक्रिया की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


3 जून को निरस्त हुआ था ठेका, फिर कैसे चल रही बोट?


प्राप्त जानकारी के अनुसार झुमका बांध में हाउस बोट/क्रूज बोट से संबंधित ठेका प्रथा को 03 जून 2026 को निरस्त किया गया था। इसके बाद भी पिछले लगभग चार-पांच दिनों से बोट का संचालन किए जाने की बात सामने आ रही है। 15 अगस्त को भी बारिश और तेज हवाओं के बीच बोट चलती देखे जाने की जानकारी मिली है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि वर्तमान में बोट संचालन के लिए न तो नियमित निविदा प्रक्रिया पूरी हुई है और न ही किसी अस्थायी टेंडर की स्पष्ट जानकारी सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब पूर्व ठेका 3 जून को निरस्त किया जा चुका था तो उसके बाद बोट संचालन किस आदेश या अनुमति के आधार पर किया जा रहा है।


70 यात्रियों की क्षमता, फिर क्षमता से अधिक सवारी का आरोप


झुमका बांध में संचालित क्रूज बोट की क्षमता लगभग 70 यात्रियों की बताई जा रही है। लेकिन 15 अगस्त को बोट में 70 से अधिक लोगों के सवार होने की बात सामने आई है। यदि यह तथ्य जांच में सही पाया जाता है तो यह सीधे तौर पर यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय होगा। विशेष रूप से बारिश और तेज हवाओं के बीच क्षमता से अधिक यात्रियों को बोट में बैठाने की शिकायत को लेकर प्रशासन को तत्काल जांच करनी चाहिए। कुछ समय पहले जबलपुर में हुए नाव हादसे के बाद जल पर्यटन गतिविधियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीरता बढ़ी थी। ऐसे में झुमका बांध में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप चिंताजनक माना जा रहा है।

₹200 प्रति व्यक्ति शुल्क, लाखों रुपये की वसूली का सवाल

वर्तमान में बोट में सफर करने वाले प्रत्येक व्यक्ति से ₹200 शुल्क रसीद के माध्यम से लिए जाने की जानकारी सामने आई है। यदि पिछले चार-पांच दिनों से नियमित रूप से संचालन हुआ है और बड़ी संख्या में पर्यटकों से राशि ली गई है तो प्रतिदिन होने वाली आय और अब तक जमा हुई कुल राशि का हिसाब सामने आना जरूरी है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब 03 जून 2026 को ठेका निरस्त हो चुका था तो इसके बाद वसूली गई राशि किस मद में जमा हो रही है? क्या इसके लिए कोई वैध अनुमति, अनुबंध या राजस्व निर्धारण किया गया है? यदि बिना वैध निविदा या अनुमति के संचालन हुआ है तो इससे शासन को राजस्व की संभावित क्षति भी हो सकती है।


पार्किंग शुल्क में भी मनमानी वसूली के आरोप


बोट संचालन के साथ झुमका बांध परिसर में पार्किंग शुल्क को लेकर भी लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। जिला प्रशासन द्वारा निर्धारित दरों के अनुसार विभिन्न वाहनों के लिए शुल्क तय होने के बावजूद पर्यटकों से अधिक राशि वसूले जाने का आरोप है। शिकायत के अनुसार जहां मोटरसाइकिल से ₹10 लिया जाना निर्धारित है, वहां ₹20 तक वसूली की जा रही है। इसी तरह ₹20 निर्धारित शुल्क वाले वाहनों से ₹40 तथा बड़े वाहनों से ₹100 से ₹200 तक लिए जाने की बात सामने आई है। पर्यटकों का आरोप है कि निर्धारित शुल्क और मौके पर मांगी जा रही राशि में अंतर होने के बावजूद उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।


पार्किंग, बोट और अन्य ठेकों की जिम्मेदारी पर भी सवाल


जानकारी के अनुसार झुमका बांध में पार्किंग, सीगारा बोट, एकोरिय हाउस और केटीक आदि से संबंधित ठेका सोनहत निवासी विकेश जायसवाल को प्राप्त होने की बात कही जा रही है। ठेका शर्तों में झुमका परिसर की सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी भी ठेकेदार की होने की जानकारी सामने आई है। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि परिसर में अपेक्षित सफाई व्यवस्था नहीं कराई जा रही है। यदि अनुबंध में सफाई की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से निर्धारित है तो प्रशासन को मौके पर निरीक्षण कर यह देखना चाहिए कि ठेका शर्तों का पालन हो रहा है या नहीं।

विद्युत कनेक्शन और शो लाइटों के रखरखाव पर भी सवाल

ठेका शर्तों में ठेकेदार के नाम से विद्युत कनेक्शन लिए जाने की बात भी बताई जा रही है। इसके बावजूद स्थानीय सूत्रों द्वारा विद्युत उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं और कथित रूप से अवैध बिजली उपयोग की बात कही जा रही है। हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं झुमका बांध परिसर में पर्यटकों के आकर्षण के लिए लगाई गई शो लाइटों के रखरखाव पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि पर्यटन स्थल के सौंदर्यीकरण पर सरकारी राशि खर्च की गई है तो उसके रखरखाव की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित होनी चाहिए।

पर्यटन विभाग और प्रशासन की  निगरानी पर सवाल

झुमका बांध को जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों में विकसित करने के लिए प्रशासन द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में पार्किंग शुल्क की कथित मनमानी वसूली, बोट संचालन की वैधता, क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने, सुरक्षा मानकों, सफाई और विद्युत व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लेना आवश्यक है। स्थानीय नागरिकों की मांग है कि जिला प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए। विशेष रूप से 03 जून 2026 को ठेका निरस्त किए जाने के बाद बोट संचालन की अनुमति किसने दी, किस आदेश के आधार पर संचालन हुआ, कितने यात्रियों से कितनी राशि वसूली गई और यह राशि किस खाते या मद में जमा हुई, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। यदि बिना वैध निविदा या अनुमति के संचालन की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग भी उठ रही है। साथ ही पार्किंग और अन्य ठेकों की शर्तों का सत्यापन, निर्धारित शुल्क की सूची प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित करने तथा प्रतिदिन की वसूली का रिकॉर्ड जांचने की आवश्यकता है।

फिलहाल लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग इन गंभीर शिकायतों पर जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाते हैं या नहीं। यदि जांच निष्पक्ष तरीके से होती है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि झुमका बांध में पर्यटन गतिविधियां नियमों के अनुरूप संचालित हो रही हैं या फिर नियमों की अनदेखी कर राजस्व और सुरक्षा दोनों से खिलवाड़ किया जा रहा है।

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