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समाचार प्रकाशन के बाद भी नहीं जागा प्रशासन, जनपद पंचायत सोनहत से लोगों को बुलाकर अवैध वसूली कराने का आरोप

झुमका बांध में टेंडर खत्म, फिर भी धड़ल्ले से हाउस बोट और पार्किंग संचालन!


बैकुण्ठपुर। जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर के प्रसिद्ध झुमका बांध में हाउस बोट संचालन और पार्किंग शुल्क वसूली को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि हाउस बोट संचालन का टेंडर 03 जून 2026 को समाप्त हो चुका है, इसके बावजूद पिछले चार-पांच दिनों से झुमका बांध में हाउस बोट का संचालन लगातार किया जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि टेंडर अवधि समाप्त होने के बाद आखिर किसके आदेश अथवा अनुमति से हाउस बोट का संचालन कराया जा रहा है?

इस पूरे मामले को लेकर पहले भी समाचार प्रकाशित किया जा चुका है, लेकिन आरोप है कि समाचार प्रकाशन के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अब स्थिति यह है कि टेंडर की अवधि समाप्त होने के बावजूद गतिविधियां जारी हैं और आम नागरिकों से पार्किंग शुल्क के नाम पर राशि वसूली जा रही है।

बकाया जमा करने के लिए कई नोटिस, फिर भी संचालन जारी

जानकारी के अनुसार संबंधित ठेकेदार विकेश जायसवाल को बकाया राशि जमा करने के लिए चार-पांच नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद बकाया राशि जमा नहीं किए जाने की बात सामने आ रही है। यदि ठेकेदार पर शासन की राशि बकाया है तो ऐसी स्थिति में टेंडर समाप्त होने के बाद भी संचालन की अनुमति किस आधार पर दी जा रही है, यह बड़ा सवाल है।

पार्किंग पर्ची के नाम पर मनमानी वसूली का आरोप

झुमका बांध में पार्किंग शुल्क को लेकर भी लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। आरोप है कि 15 जनवरी 2026 को निर्धारित शुल्क से दोगुनी राशि की पार्किंग पर्ची काटी गई थी। यदि निर्धारित दर से अधिक राशि वसूली गई तो अतिरिक्त राशि किसके आदेश पर ली गई और उसका हिसाब कहां दर्ज किया गया, इसकी जांच जरूरी है। अब फिर से पार्किंग वसूली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि जनपद पंचायत सोनहत से आठ से दस लोगों को बुलाकर झुमका बांध में पार्किंग शुल्क की वसूली कराई जा रही है। इससे आम नागरिकों में नाराजगी है और लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि जब टेंडर की अवधि समाप्त हो चुकी है तो फिर किस अधिकार के तहत पार्किंग शुल्क वसूला जा रहा है।

सफाई व्यवस्था बदहाल, बिजली उपयोग पर भी सवाल

झुमका बांध में सफाई व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पर्यटन स्थल होने के बावजूद सफाई के नाम पर पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने का आरोप है। वहीं बिजली के उपयोग को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि झुमका परिसर में बिजली का अनधिकृत उपयोग किया जा रहा है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी कथित तौर पर पूरे मामले को देखते हुए भी मौन हैं। बिजली कनेक्शन, मीटर और भुगतान की स्थिति की जांच होने पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

आखिर पूरा पैसा कहां जा रहा है?

हाउस बोट, पार्किंग और अन्य गतिविधियों से प्रतिदिन कितनी राशि वसूली जा रही है, उसका हिसाब कहां दर्ज हो रहा है और राशि किस खाते में जमा की जा रही है—यह सबसे बड़ा सवाल बन गया है। यदि बिना वैध टेंडर अथवा अनुमति के वसूली हो रही है तो शासन को राजस्व की हानि होने की भी आशंका है।

सूरजपुर-सरगुजा की पांच सदस्यीय टीम से जांच की मांग

स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच स्थानीय स्तर के अधिकारियों से कराने के बजाय सूरजपुर और सरगुजा जिले के अधिकारियों को शामिल करते हुए पांच सदस्यीय स्वतंत्र जांच टीम गठित की जानी चाहिए। जांच में टेंडर की अवधि, टेंडर की शर्तें, ठेकेदार को जारी नोटिस, बकाया राशि, पार्किंग पर्चियां, वसूली गई रकम, बैंक में जमा राशि, बिजली कनेक्शन तथा हाउस बोट संचालन की अनुमति से संबंधित सभी दस्तावेजों की जांच की जाए। झुमका बांध कोरिया जिले का प्रमुख पर्यटन स्थल है। ऐसे में यदि नियमों को ताक पर रखकर संचालन और वसूली के आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होना आवश्यक है। अब देखना होगा कि लगातार सामने आ रहे इन आरोपों और समाचार प्रकाशन के बाद जिला प्रशासन कब तक कार्रवाई करता है और आम नागरिकों से हो रही कथित अवैध वसूली पर रोक कब लगती है।

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