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पटना में शासकीय आबादी भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप, खसरा नंबर 442 पर भवन निर्माण से उठे सवाल - सुत्र


बैकुण्ठपुर। तहसील पटना क्षेत्र में शासकीय आबादी भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों के अनुसार खसरा नंबर 442, जो अभिलेखों में आबादी शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है, उस पर एक व्यक्ति द्वारा भवन निर्माण करा लिया गया है। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार संबंधित भूमि मिशल में आबादी भूमि के रूप में दर्ज है तथा वर्तमान बी-1 अभिलेख में भी शासकीय भूमि प्रदर्शित हो रही है। इसके बावजूद उक्त भूमि पर निर्माण कार्य किए जाने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि भूमि वास्तव में शासकीय है, तो निर्माण कार्य की अनुमति किस आधार पर दी गई और निर्माण के दौरान जिम्मेदार विभागों ने इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया। ग्रामीणों का दावा है कि लगभग 16 डिसमिल शासकीय भूमि पर कब्जा किए जाने की आशंका है। हालांकि कब्जे के वास्तविक रकबे की पुष्टि राजस्व विभाग द्वारा विधिवत सीमांकन (नाप-जोख) के बाद ही हो सकेगी। इसलिए स्थानीय लोगों ने सबसे पहले राजस्व अमले से मौके पर पहुंचकर भूमि का सीमांकन कराने की मांग की है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि सीमांकन में यह प्रमाणित होता है कि भवन का निर्माण शासकीय भूमि पर किया गया है, तो राजस्व नियमों के तहत अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका यह भी कहना है कि शासकीय भूमि सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित रहती है और उस पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा भविष्य में अन्य लोगों को भी नियमों की अनदेखी करने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने, भूमि अभिलेखों का परीक्षण करने तथा आवश्यक होने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि शासकीय भूमि की सुरक्षा प्रशासन की जिम्मेदारी है और यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में ऐसे मामलों की संख्या बढ़ सकती है। अब पूरे मामले में लोगों की निगाहें राजस्व विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। सीमांकन और अभिलेखों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित भवन का निर्माण शासकीय भूमि पर हुआ है या नहीं। यदि जांच में अवैध कब्जे की पुष्टि होती है, तो प्रशासन से अतिक्रमण हटाने और दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की अपेक्षा की जा रही है।

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