सूरजपुर। भैयाथान के तत्कालीन तहसीलदार रहे संजय राठौर के खिलाफ निजी स्वामित्व की भूमि के कथित अवैध नामांतरण और बिक्री का गंभीर मामला सामने आया है। किसान दीपेश दुबे ने कलेक्टर जनदर्शन में लगभग 90 पृष्ठों के दस्तावेज प्रस्तुत कर शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उनकी निजी भूमि का बिना सूचना, बिना सहमति और विधिक प्रक्रिया का पालन किए नामांतरण कर कुछ व्यक्तियों के पक्ष में दर्ज कर दिया गया तथा बाद में भूमि की बिक्री भी करा दी गई। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, भूमि की पुनर्बहाली तथा दोषियों के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के अनुसार वर्ष 1983 में आदिम जाति सेवा सहकारी समिति, केवरा द्वारा आयोजित सार्वजनिक नीलामी में दीपेश दुबे को ग्राम कोयलारी की संबंधित भूमि का क्रेता घोषित किया गया था। वर्ष 1985 में सक्षम राजस्व अधिकारी द्वारा इसकी पुष्टि की गई और 1987 में राजस्व अभिलेखों में उनका नाम विधिवत दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसके बाद से लगातार विभिन्न वर्षों के बी-1 अभिलेखों में उनका नाम भू-स्वामी के रूप में दर्ज रहा, यहां तक कि खसरा नंबरों के पुनर्नंबरिंग के बाद भी स्वामित्व यथावत बना रहा। आरोप है कि वर्ष 2024-25 के दौरान भैयाथान में पदस्थ रहते हुए तत्कालीन तहसीलदार संजय राठौर ने कथित रूप से कुछ व्यक्तियों के साथ मिलकर उनकी निजी भूमि को संयुक्त खाते की भूमि मानते हुए बिना किसी वैधानिक सूचना या सुनवाई के नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कर दी। शिकायतकर्ता का कहना है कि जिस आवेदन के आधार पर कार्रवाई की गई, उसमें संबंधित खसरा नंबरों का स्पष्ट उल्लेख तक नहीं था, फिर भी उनकी निजी भूमि को विवादित प्रक्रिया में शामिल कर लिया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि नामांतरण के बाद भूमि के कुछ हिस्सों का पंजीकृत विक्रय भी करा दिया गया। साथ ही यह दावा किया गया है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान कई राजस्व अभिलेखों में अनियमितताएं हुईं, कुछ दस्तावेजों में कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षरों का उपयोग किया गया तथा जीवित और मृत खातेदारों के संबंध में भी रिकॉर्ड में गंभीर त्रुटियां की गईं। शिकायतकर्ता ने यह भी उल्लेख किया है कि संजय राठौर के विरुद्ध पूर्व में भी अन्य भूमि संबंधी मामलों में कार्रवाई हो चुकी है तथा कुछ प्रकरणों की विभागीय जांच और न्यायालयीन कार्यवाही लंबित है। हालांकि इन मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकार अथवा न्यायालय द्वारा किया जाना शेष है। दीपेश दुबे ने कलेक्टर सूरजपुर से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, कथित रूप से अवैध नामांतरण और विक्रय को निरस्त कर उनकी भूमि उन्हें वापस दिलाई जाए तथा यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय कानून के अनुसार आपराधिक एवं विभागीय कार्रवाई की जाए। फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से शिकायत पर अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। अब यह देखना होगा कि जांच में प्रस्तुत दस्तावेजों और आरोपों के आधार पर प्रशासन क्या निष्कर्ष निकालता है और मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाती है।

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