Ticker

6/recent/ticker-posts

जीवित वृद्ध महिला को मृत दिखाकर जमीन हड़पने का मामला तहसीलदार समेत पांच के खिलाफ FIR दर्ज


सौतेले बेटे बीरेंद्र दुबे ने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर कराया भूमि नामांतरण ,आधे भूमि को भतीजे शिवम और संजय को बेचा और आधे को दिया पुत्र कमलेश दुबे को दान

 झिलमिली थाने में BNS की धाराओं में अपराध पंजीबद्ध

कोरिया/सूरजपुर। जिले के झिलमिली थाना क्षेत्र के पटवारी हल्का नंबर 11 के ग्राम करकोटी  में भूमि नामांतरण और फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस ने  शिकायत की जांच (जो कि लगभग 15 माह तक चली) के बाद जीवित  महिला को मृत बता जमीन को हड़पने के लिए  तैयार दस्तावेजों में हेरफेर और फर्जीवाड़ा करने के आरोप में तत्कालीन तहसीलदार भैयाथान संजय कुमार राठौर सहित पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। FIR क्रमांक 0185/2026 दिनांक 03 अगस्त 2026 को झिलमिली थाना में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई है। पुलिस दस्तावेज के अनुसार प्रकरण में धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) एवं 61(2) BNS लगाई गई हैं। घटना से संबंधित अवधि 27 दिसंबर 2024 से 03 जनवरी 2025 तक दर्ज की गई है।

सन् 1976  की जमीन को सन् 1967 का मृत्यु पत्र का मृत्यु प्रमाण पत्र लगा कर किया नामांतरण

शिकायत में ग्राम कोयलारी निवासी शैल कुमारी देवी पति स्व. राधेश्याम दुबे की भूमि का मामला उठाया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि राजस्व रिकॉर्ड में शैल कुमारी की भूमि खसरा नंबर 344 सहित अन्य हिस्सों में दर्ज थी। शिकायत के अनुसार  आवेदिका ने बताया है की बीरेंद्र दुबे द्वारा शैल कुमारी की मृत्यु 09 फरवरी 1967 को बताई गई है , जबकि संबंधित भूमि उनके द्वारा संबंध में 11 अगस्त 1976 को रजिस्टर्ड बिक्री विलेख के माध्यम से भूमि खरीदे जाने का दस्तावेज भी रिकॉर्ड में मौजूद है

शिकायत में आरोप लगाया गया कि बाद में इसी भूमि से संबंधित नामांतरण प्रक्रिया में शैल कुमारी को मृत बताकर दस्तावेज तैयार किए गए और कथित रूप से उनकी मृत्यु का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया। इसके आधार पर राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई। वहीं दूसरी ओर उसी समय दिनांक 31/12/24 को तत्कालीन तहसीलदार  संजय राठौर द्वारा  ग्राम कोईलारी स्थित भूमि का भी बटवारा किया गया जिसमें शैल कुमारी के तीन पुत्र और दो पुत्रियों का नाम जोड़ा गया।

एक माह के भीतर नामांतरण और जमीन का लेन-देन

FIR में दर्ज शिकायत के अनुसार 28 नवंबर 2024 को नामांतरण के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया था। इसके बाद 27 दिसंबर 2024 को कथित रूप से आवेदिका के नाम को विलोपित कर विरेंद्रनाथ दुबे के नाम रिकॉर्ड दुरुस्त किया गया। इसके बाद 02 जनवरी 2025 को भूमि विक्रय के लिए तहसीलदार ने खुद ही चौहद्दी जारी किया और अगले दिन यानी 03 जनवरी 2025 को भूमि के कुछ हिस्से का विक्रय एवं रजिस्ट्री के दिया गया । शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि भूमि के आधे हिस्से को कमलेश दुबे एवं आधे को शिवम दुबे ,संजय के नाम कर दिया जिसे तत्काल ही शिवम और संजय द्वारा भैयाथान के प्रशांत अग्रवाल को बिक्री किया गया जिसके नामांतरण पर आवेदिका शैलकुमारी के आपत्ति पर नामांतरण नहीं हुआ है।

कलेक्टर कोर्ट में भूमि के चल रहे मामले के बीच में ही हुआ पूरा खेल

इस संबंध में जब आवेदिका से बात की गई तो उन्होंने बताया कि इसी भूमि के रकबे में त्रुटि हो गई थी जिसमें एसडीएम भैयाथान ने मेरे पक्ष में डिग्री दिया था जिससे क्षुब्द होकर विष्णु कुशवाहा ने कलेक्टर सूरजपुर में अपील किया था जब मेरे इस भूमि का पूरा खेल हुआ उस समय भी मामला कलेक्टर न्यायालय सूरजपुर में चल रहा था।

हाइकोर्ट में भी ग्राम कोइलारी स्थित सम्मिलित खाते की भूमि में भी आवेदिका पक्षकार है ,

वही आवेदिका शैलकुमारी ने बताया कि ग्राम कोईलारी के श्री जगदीश शर्मा से भी एक भूमि का उनका हाइ कोर्ट बिलासपुर में मामला लगभग 10 वर्षों से चल रहा है ।

जांच में मृत्यु प्रमाण पत्र भी पाया गया फर्जी

पुलिस जांच के दौरान शिकायतकर्ता और गवाहों के बयान दर्ज किए गए। FIR में उल्लेख है कि मृत्यु प्रमाण पत्र की जांच के लिए संबंधित थाने एवं अधिकारियों से जानकारी ली गई। शिकायतकर्ता का आरोप था कि शैल कुमारी की मृत्यु वर्ष 1967 में हो चुकी थी, लेकिन बाद के राजस्व एवं न्यायिक दस्तावेजों में उनकी स्थिति को लेकर विरोधाभासी तथ्य प्रस्तुत किए गए। दस्तावेज में यह भी उल्लेख है कि पूर्व में राजस्व अधिकारियों के समक्ष इस मामले को लेकर शिकायत और जांच की कार्रवाई हुई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि शैल कुमारी को जीवित होने के बावजूद मृत दर्शाकर अथवा उनकी वास्तविक मृत्यु संबंधी तथ्यों को छिपाकर भूमि का नामांतरण कराया गया।

तहसीलदार की भूमिका पर गंभीर आरोप

शिकायत में तत्कालीन तहसीलदार संजय कुमार राठौर पर पद का दुरुपयोग करते हुए कथित रूप से बिना तथ्यों की पर्याप्त जांच के नामांतरण आदेश पारित करने का आरोप लगाया गया है। साथ ही उनकी पत्नी के नाम से भी संबंधित अवधि में भूमि की रजिस्ट्री होने का उल्लेख शिकायत में किया गया है। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले को आपराधिक षड्यंत्र बताते हुए दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की थी। FIR में आरोपी के रूप में विरेंद्रनाथ दुबे, संजय कुमार राठौर, अंजलिया भगत, कमलेश दुबे तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों के नाम दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज के उपयोग और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है।

कई दस्तावेज पुलिस को सौंपे गए 

शिकायतकर्ता की ओर से तहसील न्यायालय के दस्तावेज, नामांतरण आवेदन, शपथ पत्र, पंचनामा एवं प्रतिवेदन, रजिस्टर्ड बिक्री विलेख, बी-1 रिकॉर्ड, अभिलेख दुरुस्ती, जीवित प्रमाण पत्र, पूर्व न्यायालयीन आदेश तथा अन्य राजस्व दस्तावेज पुलिस को उपलब्ध कराए गए हैं। अब FIR दर्ज होने के बाद पुलिस की जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे जारी हुआ, राजस्व रिकॉर्ड में किस स्तर पर परिवर्तन किया गया और भूमि के नामांतरण एवं विक्रय की पूरी प्रक्रिया में किन-किन लोगों की वास्तविक भूमिका रही। मामला दर्ज होने के बाद अब पुलिस जांच के परिणाम पर सभी की निगाहें टिकी हैं। यदि दस्तावेजों में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह मामला राजस्व रिकॉर्ड और भूमि लेन-देन में कथित फर्जीवाड़े का गंभीर उदाहरण बन सकता है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ