बोड़ार ग्राम पंचायत में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की मिसाल, कलेक्टर रोक्तिमा यादव की पहल लाई रंग
कोरिया। जिले में स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर कलेक्टर कोरिया रोक्तिमा यादव के निर्देशन में शुरू की गई पहल अब धरातल पर दिखाई देने लगी है। ग्राम पंचायत बोड़ार जिले की पहली ऐसी ग्राम पंचायत बन गई है, जहां ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के तहत कचरा संग्रहण, पृथक्करण एवं निष्पादन की व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप शुरू की गई है। जिला प्रशासन की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता को लेकर नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।
चार श्रेणियों में कचरे का पृथक्करण
बोड़ार ग्राम पंचायत में घरों और संस्थानों से निकलने वाले कचरे को गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी वेस्ट तथा विशेष अपशिष्ट की चार श्रेणियों में अलग-अलग किया जा रहा है। पंचायत क्षेत्र के सामुदायिक एवं व्यक्तिगत शौचालयों के साथ विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों और शासकीय संस्थानों में भी स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास किया गया है। इस व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ग्रामीणों को केवल सफाई के लिए प्रेरित नहीं किया जा रहा, बल्कि कचरे को उसके स्रोत पर ही अलग करने की आदत विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
स्वच्छता दीदियां बनीं अभियान की ताकत
स्वच्छता अभियान को सफल बनाने में महिला स्व-सहायता समूह की सदस्यों की भी महत्वपूर्ण भूमिका सामने आ रही है। अंजनी, हिरामती, मिथल एवं कलावती घर-घर पहुंचकर ग्रामीणों को कचरा पृथक्करण, स्वच्छता और इसके महत्व के संबंध में जागरूक कर रही हैं। ग्रामीणों की सहभागिता से प्रशासन की इस पहल को मजबूती मिल रही है।
अक्टूबर तक 45 पंचायतों में लागू करने का लक्ष्य
जिला पंचायत सीईओ योगेंद्र श्रीवास के अनुसार कलेक्टर के निर्देश पर अक्टूबर तक जिले की 45 ग्राम पंचायतों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 को पूर्ण रूप से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। यह पहल यदि इसी गति से आगे बढ़ती है तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को स्थायी रूप से मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। कलेक्टर रोक्तिमा यादव का यह प्रयास सराहनीय है कि स्वच्छता को केवल सरकारी अभियान न मानकर जनभागीदारी से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। ग्रामीणों की सहभागिता और महिला समूहों की सक्रिय भूमिका इस अभियान को और प्रभावी बना रही है।
गेज नदी के संरक्षण की भी दरकार
स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रशासन की इस पहल के बीच अब जिला मुख्यालय की जीवनदायिनी गेज नदी के संरक्षण की ओर भी गंभीर पहल की आवश्यकता महसूस की जा रही है। गेज नदी बैकुण्ठपुर क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोत है। नदी के आसपास की भूमि पर लगातार हो रहे कथित अतिक्रमण और अवैध कब्जों को लेकर समय-समय पर शिकायतें तथा समाचार प्रकाशन भी हुए हैं। सीएम हेल्पलाइन और जनदर्शन के माध्यम से भी इस संबंध में प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया गया है।
अब आवश्यकता है कि जिस गंभीरता के साथ जिला प्रशासन ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर काम कर रहा है, उसी तरह गेज नदी की सीमा, नदी से लगी शासकीय एवं अन्य भूमियों की स्थिति और संभावित अतिक्रमण की भी जांच कराई जाए।
इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा पांच सदस्यीय निष्पक्ष जांच टीम गठित कर नदी की वास्तविक स्थिति, सीमांकन, भूमि अभिलेख और मौके की स्थिति का परीक्षण कराया जा सकता है। इससे गेज नदी के संरक्षण को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी और भविष्य में किसी भी प्रकार के अतिक्रमण को रोकने में मदद मिलेगी। बोड़ार से शुरू हुई स्वच्छता की पहल अब जिले की अन्य पंचायतों तक पहुंचे और गेज नदी के संरक्षण की दिशा में भी प्रशासन ठोस कदम उठाए, तो यह कोरिया के पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।

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