Ticker

6/recent/ticker-posts

बैकुण्ठपुर उप पंजीयक कार्यालय पर गंभीर सवाल: शासकीय भूमि की रजिस्ट्री और दलालों के नेटवर्क के आरोप


अहस्तांतरणीय भूमि के दस्तावेजों में बदलाव, बिना मिशल रजिस्ट्री और दस्तावेज लेखक की भूमिका पर उठे प्रश्न

 

बैकुण्ठपुर। जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर स्थित उप पंजीयक कार्यालय एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। राजस्व और पंजीयन व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि स्वतः नामांतरण की व्यवस्था लागू होने के बाद से भू-माफियाओं की सक्रियता बढ़ी है और शासकीय अथवा अहस्तांतरणीय भूमि की रजिस्ट्री तक किए जाने के मामले सामने आ रहे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग भी तेज हो गई है।

 ग्राम कोट के खसरा क्रमांक 290 की रजिस्ट्री पर विवाद

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बैकुण्ठपुर तहसील अंतर्गत ग्राम कोट के खसरा क्रमांक 290 की भूमि के बी-1 अभिलेख में पहले "अहस्तांतरणीय" शब्द दर्ज था। आरोप है कि कुछ ही दिनों के भीतर संबंधित अभिलेख में संशोधन कर यह उल्लेख किया गया कि उक्त प्रविष्टि त्रुटिवश दर्ज हुई थी। इसके बाद 31 जुलाई 2026 को इसी भूमि की रजिस्ट्री कर दी गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस भूमि पर वर्षों से किसी अन्य व्यक्ति का कब्जा बताया जाता है, उसी भूमि के स्वामित्व और रजिस्ट्री को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले में राजस्व अभिलेखों, आदेशों और रजिस्ट्री प्रक्रिया की गहन जांच की मांग की जा रही है।

 एक ही व्यक्ति के पास कई लाइसेंस होने पर उठे सवाल

घड़ी चौक स्थित एक ऑनलाइन सेवा केंद्र संचालक को लेकर भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि संबंधित व्यक्ति ने दस्तावेज लेखक (डीड राइटर) का लाइसेंस प्राप्त कर रखा है तथा स्टाम्प विक्रेता का लाइसेंस भी उसके पास है। साथ ही उसी स्थान से लोक सेवा केंद्र का संचालन भी किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि एक ही व्यक्ति के पास एक से अधिक प्रकार के लाइसेंस होने तथा उससे जुड़े कार्यों की वैधता की जांच आवश्यक है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

 कार्यालय से दूर बैठकर रजिस्ट्री कराने का आरोप


सूत्रों का कहना है कि संबंधित दस्तावेज लेखक उप पंजीयक कार्यालय में नियमित रूप से बैठने के बजाय कार्यालय से लगभग 800 मीटर दूर स्थित अपने ओनलाईन दुकान कुमार चौक के पास से ही दस्तावेज तैयार कर रजिस्ट्री प्रक्रिया संचालित कराता है। आरोप यह भी है कि जिन मामलों में वर्षों तक मिशल (राजस्व अभिलेख) के अभाव में रजिस्ट्री लंबित रही, उन्हीं मामलों में बाद में रजिस्ट्री करा दी गई। यदि ऐसा हुआ है तो यह जांच का विषय माना जा रहा है कि संबंधित मामलों में आवश्यक दस्तावेज एवं वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।

 रामपुर की भूमि की रजिस्ट्री भी जांच के दायरे में लाने की मांग


सूत्रों ने ग्राम रामपुर की एक भूमि का भी उल्लेख किया है, जिसकी रजिस्ट्री को लेकर इसी प्रकार के आरोप लगाए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पिछले लगभग पांच वर्षों में जिन-जिन मामलों में मिशल या राजस्व अभिलेखों को लेकर विवाद रहा है, उन सभी रजिस्ट्रियों की उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए।

 रजिस्ट्री दस्तावेज जब्त कर निष्पक्ष जांच की मांग

 क्षेत्र के लोगों ने मांग की है कि ग्राम कोट के खसरा क्रमांक 290 से संबंधित रजिस्ट्री दस्तावेजों को सुरक्षित रखते हुए उनकी विधिवत जांच कराई जाए। साथ ही जिन अधिकारियों, कर्मचारियों अथवा अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका सामने आए, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ