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क्या कोरिया जिले में बेलगाम हो चुका है राजस्व तंत्र? अवैध प्लाटिंग, डायवर्सन और बिचौलियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल


बैकुण्ठपुर। कोरिया जिले के राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। विभिन्न मामलों से जुड़े लोगों एवं स्थानीय सूत्रों का दावा है कि जिले में अवैध प्लाटिंग, भूमि डायवर्सन, मुआवजा प्रकरणों और राजस्व न्यायालय की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को लेकर कई तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी सामने आना बाकी है। सूत्रों के अनुसार, कमिश्नर कार्यालय द्वारा जिन क्षेत्रों में अवैध प्लाटिंग को लेकर कार्रवाई या आदेश जारी किए गए थे, उन्हीं क्षेत्रों की कुछ भूमि के डायवर्सन के लिए ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कुछ मामलों में नियमों की अनदेखी कर डायवर्सन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। सूत्रों का यह भी कहना है कि बैकुण्ठपुर की चर्चित भूमि खसरा क्रमांक  से जुड़े मामले में, जहां सड़क मद में स्थित शीशम के पेड़ों को काटने की अनुमति दिए जाने को लेकर पहले भी सवाल उठे थे, अब उसी भूमि के डायवर्सन की प्रक्रिया को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। वहीं संबंधित अधिकारियों का कहना है कि बैकुण्ठपुर क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग का कोई मामला नहीं है और लगाए जा रहे आरोप तथ्यात्मक नहीं हैं। राजस्व कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार झुमका वोट क्लब, रेलवे मुआवजा, राष्ट्रीय राजमार्ग मुआवजा तथा गेज नदी मुआवजा जैसे मामलों में बिचौलियों की सक्रियता की शिकायतें लंबे समय से मिल रही हैं। आरोप यह भी है कि राजस्व न्यायालय के अधिकांश प्रकरण ऑनलाइन उपलब्ध हैं, लेकिन कुछ मुआवजा प्रकरणों का रिकॉर्ड अब तक ऑनलाइन नहीं होने से पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। इसी बीच एक आवेदक द्वारा यह भी दावा किया गया है कि उसने 30 जनवरी 2026 को संबंधित प्रकरण की नकल प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था, लेकिन कई माह बीत जाने के बाद भी उसे अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए। आवेदक का आरोप है कि पूछताछ करने पर संबंधित कर्मचारी द्वारा अधिकारी की अनुमति नहीं होने की बात कही जाती है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि झुमका से जुड़े एक टेंडर प्रकरण में कथित रूप से रिश्वत की बातचीत होने की ऑडियो रिकॉर्डिंग होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इस रिकॉर्डिंग की सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी सक्षम जांच एजेंसी ने इसकी पुष्टि की है। कार्यालय आने वाले कुछ लोगों का आरोप है कि आम आवेदकों को संबंधित लिपिक के पास बैठने या सीधे जानकारी लेने में कठिनाई होती है, जबकि कथित बिचौलियों की पहुंच आसान बताई जाती है। इसके अलावा मिशन स्कूल के पास स्थित भूमि, वन विभाग की भूमि तथा कथित अवैध प्लाटिंग से जुड़े अन्य मामलों को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

यदि इन आरोपों में तथ्य हैं तो यह गंभीर जांच का विषय हो सकता है। आवश्यक है कि जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और संबंधित सक्षम एजेंसियां पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं तथा सभी पक्षों को सुनते हुए तथ्यों को सार्वजनिक करें, ताकि आम जनता का प्रशासन पर विश्वास बना रहे।

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