वसीयत के आधार पर नामांतरण पर सवाल, जांच पूरी होने तक भूमि विक्रय पर रोक की मांग
कोरिया। पटना तहसील कार्यालय में चल रहे प्रकरण क्रमांक 20260501330009/अ-6 में पारित आदेश को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्राम अमहर के खसरा नंबर 273 सहित अन्य भूमि के वसीयत के आधार पर नामांतरण के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया था। नायब तहसीलदार पटना द्वारा आवेदक का दावा खारिज किए जाने के बाद मामला अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बैकुंठपुर के न्यायालय पहुंचा, जहां पूर्व आदेश को निरस्त करते हुए नया आदेश पारित किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में सामने आए दस्तावेजों और पूर्व की घटनाओं को देखते हुए अब पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। बताया जा रहा है कि जिस बुजुर्ग व्यक्ति से वसीयत प्राप्त किए जाने का दावा किया गया है, उसका नाम पूर्व में धान बिक्री से जुड़े विवाद में भी सामने आया था। उस दौरान संबंधित बुजुर्ग द्वारा कथित रूप से धान बेचने की अनुमति नहीं दिए जाने की बात कही गई थी। इस संबंध में पटवारी द्वारा पंचनामा बनाए जाने तथा घटना का वीडियो सामने आने की बात भी कही जा रही है। वसीयत में हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार वसीयतकर्ता हस्ताक्षर करता था, जबकि संबंधित वसीयत में अंगूठे का निशान होने की बात कही जा रही है। यदि यह तथ्य दस्तावेजों से प्रमाणित होता है तो वसीयत की वास्तविकता और उसके निष्पादन की परिस्थितियों की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
जांच पूरी होने तक खसरा नंबर 273 की भूमि के विक्रय अथवा हस्तांतरण पर रोक लगाए जाने की मांग भी उठ रही है, ताकि जांच के दौरान भूमि की स्थिति में कोई बदलाव न हो। साथ ही वसीयत, उसके गवाह, पंजीयन, नामांतरण प्रक्रिया तथा पूर्व में हुए विवादों से संबंधित सभी अभिलेखों की जांच की मांग की जा रही है। इसी तरह चेर, मंडलपारा और महलपारा से जुड़े एक अन्य भूमि विवाद को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि उक्त मामले में जिला न्यायालय के आदेश के बाद एसडीएम बैकुंठपुर द्वारा अलग आदेश पारित किया गया है और मामला उच्च न्यायालय में भी विचाराधीन बताया जा रहा है। ऐसे मामलों में न्यायालयीन आदेशों के बाद राजस्व स्तर पर पारित आदेशों की वैधानिक स्थिति क्या है, इसकी स्पष्टता आवश्यक है। इन प्रकरणों को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि अधीनस्थ राजस्व न्यायालय अथवा जिला न्यायालय के पूर्व आदेशों के बाद एसडीएम न्यायालय द्वारा किन वैधानिक प्रावधानों और अभिलेखों के आधार पर अलग आदेश पारित किए गए। यदि आदेश पारित करने की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप है तो प्रशासन को इसका स्पष्ट आधार सार्वजनिक करना चाहिए।
वहीं कार्यालयीन गतिविधियों को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि बैकुंठपुर एसडीएम कार्यालय में देर शाम तक कामकाज होने की स्थिति देखी जा रही है। पहले जहां कार्यालय समय लगभग शाम 5.30 बजे तक बताया जाता था, वहीं अब रात करीब 8 बजे तक कार्यालय खुलने की चर्चा है। हालांकि देर रात तक कार्यालय खुलने के कारणों और वहां होने वाले कार्यों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। साथ ही किसी भी व्यक्ति या दलाल की भूमिका को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की पुष्टि जांच के बिना नहीं की जा सकती। ऐसे में कलेक्टर कोरिया द्वारा अमहर खसरा नंबर 273 सहित संबंधित मामलों की फाइल, वसीयत, नामांतरण रिकॉर्ड, न्यायालयीन आदेश और कार्यालयीन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। जांच पूरी होने तक विवादित भूमि के हस्तांतरण पर रोक लगाने का निर्णय भी सक्षम राजस्व अधिकारी द्वारा नियमानुसार लिया जा सकता है। यह चर्चा आम हो गई है कि एक कुर्सी मे जक ही जगह अधिक समय तक बैठने के बाद अधिकारी बेलगाम हो जाते है आवेदक परेशान हो जाते है।


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