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नियम ताक पर, निजी स्कूल बेपरवाह: क्या शिक्षा विभाग करेगा कार्रवाई?


कोरिया। जिले में संचालित कई निजी विद्यालयों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। शिक्षा के नाम पर संचालित कुछ संस्थानों पर आरोप है कि वे शासन द्वारा निर्धारित मानकों और नियमों का पूर्ण पालन नहीं कर रहे हैं। ऐसे में अभिभावकों और नागरिकों के बीच यह चर्चा तेज है कि क्या जिला शिक्षा विभाग इन मामलों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करेगा। निजी विद्यालयों के संचालन के लिए राज्य शासन एवं शिक्षा विभाग द्वारा भवन, भूमि, सुरक्षा, पेयजल, शौचालय, खेल मैदान, पुस्तकालय तथा योग्य शिक्षकों की नियुक्ति सहित कई मानक निर्धारित किए गए हैं। विद्यालयों को मान्यता प्राप्त करने के लिए इन शर्तों का पालन करना अनिवार्य होता है। इसके बावजूद जिले में ऐसे विद्यालयों की चर्चा होती रही है जहां खेल मैदान का अभाव है, भवन मानकों पर सवाल उठते हैं या अन्य आवश्यक सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि विद्यालय केवल भवन में कक्षाएं संचालित कर देने से मान्यता के सभी मानकों को पूरा नहीं माना जा सकता। बच्चों की सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बुनियादी सुविधाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। यदि किसी विद्यालय द्वारा निर्धारित नियमों की अनदेखी की जाती है तो संबंधित अधिकारियों को निरीक्षण कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

जिले के नागरिकों का मानना है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को समय-समय पर निजी विद्यालयों का भौतिक निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी संस्थान मान्यता की शर्तों का पालन कर रहे हैं या नहीं। यदि कहीं अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार नोटिस, मान्यता निलंबन अथवा अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कोरिया जिले में संचालित निजी विद्यालयों की वर्तमान स्थिति क्या है? कितने विद्यालय निर्धारित भूमि, भवन एवं अन्य मानकों पर खरे उतरते हैं और कितनों की जांच आवश्यक है? इस विषय पर शिक्षा विभाग की कार्रवाई और निरीक्षण रिपोर्ट का इंतजार।

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