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बैकुण्ठपुर के वार्ड-09 में नाली निर्माण पर सवाल, गुणवत्ता से समझौता, नियमों की अनदेखी के आरोप

लगातार 10 दिनों से सड़क बदहाल, ठेकेदार व संबंधित अधिकारी कुम्भकर्णीय नींद में



बैकुण्ठपुर। नगर पालिका परिषद बैकुण्ठपुर के वार्ड क्रमांक 09 महलपारा में पंकज पाण्डेय के घर से महेन्द्र पाण्डेय के घर तक चल रहे नाली निर्माण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि निर्माण कार्य प्राक्कलन एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं कराया जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि पिछले 10 से 12 दिनों से मुख्य मार्ग पूरी तरह बाधित है, लेकिन न तो ठेकेदार ने वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था की और न ही संबंधित अधिकारियों ने वार्डवासियों की समस्या का समाधान कराया।

वाइब्रेटर का उपयोग नहीं, सरिया तक दिखाई दे रहा

स्थानीय लोगों के अनुसार नाली निर्माण में कंक्रीट डालते समय वाइब्रेटर का उपयोग नहीं किया जा रहा है। इसके कारण कई स्थानों पर सरिया तक दिखाई दे रहा है। निर्माण कार्य लगभग आधा पूरा हो चुका है, लेकिन अब तक एक बार भी वाइब्रेटर का उपयोग नहीं किया गया। वार्डवासियों का कहना है कि इसकी जानकारी कई बार संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार सुनील मौर्य को दी गई, फिर भी गुणवत्ता सुधारने की कोई पहल नहीं हुई।

दो दिनों से बारिश नहीं, फिर भी नहीं हुई तराई

निर्माण कार्य के बाद कंक्रीट की नियमित तराई भी नहीं कराई जा रही है। लोगों का कहना है कि पिछले दो दिनों से बारिश नहीं हुई है, ऐसे में निर्माण की मजबूती के लिए तराई आवश्यक थी, लेकिन इस ओर पूरी तरह लापरवाही बरती गई। इससे भविष्य में नाली की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।

नियमों को ताक पर रखकर सड़क किनारे फेंकी गई मिट्टी



वार्डवासियों के अनुसार खुदाई से निकली मिट्टी को नियमानुसार लगभग 100 मीटर दूर डंप किया जाना था, लेकिन ठेकेदार के कर्मचारियों ने पूरी मिट्टी नाली के किनारे ही डाल दी। इससे सड़क संकरी हो गई और लोगों का आवागमन प्रभावित हो गया। बारिश के बाद सड़क कीचड़ में बदल गई है तथा ट्रैक्टरों की आवाजाही से हालात और खराब हो गए हैं।

डायवर्जन नहीं बनाया, स्कूली बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशान



निर्माण कार्य के दौरान वैकल्पिक मार्ग बनाना आवश्यक होता है, लेकिन वार्डवासियों का आरोप है कि ठेकेदार ने कोई डायवर्जन मार्ग नहीं बनाया। परिणामस्वरूप स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को प्रतिदिन भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग कीचड़ और मलबे के बीच से निकलने को मजबूर हैं।

रात में भी चलता रहा निर्माण कार्य, विरोध के बाद रुका



स्थानीय लोगों ने बताया कि निर्माण कार्य रात के समय भी कराया जा रहा था। इससे आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी हुई। वार्डवासियों के विरोध के बाद रात में कार्य बंद कराया गया। लोगों का आरोप है कि ठेकेदार निर्माण स्थल से लगभग 90 किलोमीटर दूर बैठकर केवल दूरभाष के माध्यम से कार्य का संचालन कर रहे हैं।

सरगुजा से लाए गए मजदूर, श्रम पंजीयन और सुरक्षा उपकरण नहीं

निर्माण कार्य में लगे अधिकांश मजदूर सरगुजा जिले से लाए गए बताए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मजदूरों का श्रम पंजीयन नहीं है और उन्हें हेलमेट, सुरक्षा जूते, दस्ताने सहित अन्य सुरक्षा उपकरण भी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। साथ ही लगातार लगभग 10 दिनों से कार्य कराया जा रहा है, जबकि श्रम नियमों के अनुसार सप्ताह में एक दिन 24 घंटे का विश्राम दिया जाना चाहिए।

स्लैब निर्माण पर भी उठे सवाल

नाली के ऊपर लगभग 8 फीट लंबे स्लैब डाले जा रहे हैं। वार्डवासियों का कहना है कि कई स्थानों पर एयर पास (वेंटिलेशन) के लिए पर्याप्त जगह भी नहीं छोड़ी जा रही है। इससे भविष्य में सफाई और जल निकासी की समस्या उत्पन्न होने की आशंका जताई जा रही है।

वार्ड पार्षद नहीं पहुंचे निर्माण स्थल

वार्डवासियों का कहना है कि भूमि पूजन के लिए वार्ड पार्षद को आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे नहीं पहुंचे। निर्माण कार्य शुरू हुए लगभग 10 से 12 दिन हो चुके हैं, फिर भी वार्ड पार्षद ने मौके पर पहुंचकर लोगों की समस्याओं का जायजा नहीं लिया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले वर्ष सड़क पर मुरुम डलवाने की मांग भी केवल आश्वासन तक सीमित रही थी।

जांच और कार्रवाई की मांग

वार्डवासियों ने जिला प्रशासन और नगर पालिका से पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच, वाइब्रेटर के उपयोग, तराई, श्रम कानूनों के पालन तथा प्राक्कलन के अनुरूप कार्य की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो निम्न गुणवत्ता का यह निर्माण भविष्य में बड़ी समस्या बन सकता है।

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