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कोरिया जिले में एसईसीएल क्षेत्र से अवैध कबाड़ और तांबे के कारोबार के आरोप, बाहरी कबाड़ कारोबारियों के सत्यापन की उठी मांग

 


कोरिया। कोरिया जिले में एसईसीएल क्षेत्र से कथित रूप से अवैध कबाड़, लोहा और तांबे के कारोबार को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिले के कुछ थाना क्षेत्रों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में एसईसीएल का लोहा और तांबा अवैध रूप से बाहर निकाला जा रहा है। इन आरोपों के बीच पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा अवैध कारोबार में संलिप्त लोगों पर कड़ी कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

स्थानीय लोगों का दावा है कि जिला मुख्यालय से जुड़े कोतवाली और चरचा थाना क्षेत्र में एसईसीएल के कबाड़, लोहे और तांबे की अवैध खरीद-फरोख्त लंबे समय से जारी है। आरोप है कि चरचा एसईसीएल के टीना दफाई क्षेत्र में देर रात गतिविधियां संचालित होती हैं। कुछ लोगों का कहना है कि रात लगभग 1 बजे के बाद से सुबह करीब 5 बजे तक अस्पताल वाली सड़क घाट के पास उतरकर बाईं ओर स्थित सीसी सड़क के आसपास कथित रूप से अवैध लोहे का कारोबार होता है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसी प्रकार स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि चरचा के घुटरी दफाई क्षेत्र में भी लंबे समय से कथित रूप से अवैध कबाड़ और तांबे का कारोबार संचालित हो रहा है। वहीं पटना थाना क्षेत्र के कटकोना और पंडोपारा इलाके से भी एसईसीएल सामग्री के कथित अवैध परिवहन के आरोप लगाए जा रहे हैं। कुछ लोगों ने यह भी दावा किया है कि थाना क्षेत्र में अवैध गांजा कारोबार की शिकायतें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। इसके अलावा कसरा क्षेत्र में एक स्थानीय व्यक्ति पर अवैध कबाड़ के कारोबार में संलिप्त होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इन सभी आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का बयान भी सामने नहीं आया है। स्थानीय लोगों का यह भी दावा है कि कोरिया जिले में मध्य प्रदेश के बिजुरी, कोतमा, जबलपुर तथा अन्य क्षेत्रों से कुछ लोग कबाड़ खरीदने और बेचने का कार्य करने आते हैं। आरोप है कि ऐसे लोगों का पुलिस सत्यापन नहीं कराया जाता और न ही उनके संबंध में स्थानीय स्तर पर पर्याप्त जानकारी उपलब्ध रहती है। लोगों का कहना है कि ये कथित कबाड़ कारोबारी शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में घूम-घूमकर कबाड़ खरीदने एवं एकत्रित करने का कार्य करते हैं, इसलिए उनके सत्यापन और गतिविधियों की निगरानी की आवश्यकता है। हालांकि इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कुछ नागरिकों ने यह भी कहा कि पूर्व में बिजली विभाग सहित अन्य शासकीय संस्थानों की सामग्री चोरी होने की घटनाएं सामने आई थीं। उनका कहना है कि ऐसी घटनाओं की प्रभावी जांच और कार्रवाई होने से चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि कबाड़ कारोबारियों के दस्तावेजों, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और पहचान का नियमित सत्यापन किया जाए, तो चोरी के माल की खरीद-फरोख्त पर भी रोक लगाने में मदद मिल सकती है। स्थानीय नागरिकों ने यह भी मांग की है कि जिले में बाहर से आकर किराये के मकानों में रहने वाले व्यक्तियों तथा कबाड़ का व्यवसाय करने वालों का पुलिस सत्यापन सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना है कि यदि इस संबंध में पुलिस मुख्यालय या सरगुजा रेंज स्तर से कोई निर्देश जारी किए गए हैं, तो उनका प्रभावी पालन कराया जाना चाहिए। साथ ही मुसाफिर पंजी, किरायेदार सत्यापन और कबाड़ कारोबारियों के पंजीयन की नियमित समीक्षा की जाए। लोगों का कहना है कि यदि प्रतिदिन लाखों रुपये मूल्य का तांबा और अन्य धातु एसईसीएल क्षेत्र से बाहर जा रही है, तो इसकी गहन जांच आवश्यक है। उन्होंने पुलिस विभाग, एसईसीएल प्रबंधन और जिला प्रशासन से संयुक्त अभियान चलाकर पूरे नेटवर्क की जांच करने, एसईसीएल क्षेत्रों में सीसीटीवी निगरानी बढ़ाने, नियमित गश्त, संदिग्ध वाहनों की जांच तथा कबाड़ कारोबारियों के रिकॉर्ड का सत्यापन करने की मांग की है। फिलहाल समाचार में उल्लिखित सभी बातें स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोप और दावे हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस, एसईसीएल प्रबंधन और जिला प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। यदि संबंधित एजेंसियां इन आरोपों पर कोई स्पष्टीकरण जारी करती हैं, तो उसे भी समान महत्व के साथ प्रकाशित किया जाएगा।

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