बैकुण्ठपुर। महिला एवं बाल विकास विभाग के बैकुण्ठपुर स्थित परियोजना कार्यालय के कामकाज को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार कार्यालय देर रात तक खुला रहता है और कई बार रात 11 से 12 बजे तक कार्यालय में अधिकारी-कर्मचारियों की मौजूदगी देखी जा रही है। बताया जा रहा है कि पूर्व में भी कार्यालय के देर रात तक संचालित होने को लेकर समाचार प्रकाशित होने के बाद कलेक्टर कोरिया द्वारा परियोजना अधिकारी को फटकार लगाई गई थी, बावजूद इसके कार्यप्रणाली में अपेक्षित सुधार नहीं होने की बात सामने आ रही है।
रात में अभ्यर्थियों को बुलाने की चर्चा
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका भर्ती से संबंधित नियुक्ति आदेश लेने के लिए कुछ आवेदकों को रात 9 बजे से 11 बजे तक कार्यालय में बैठाए जाने और देर रात नियुक्ति आदेश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि कुछ नियुक्ति आदेशों के लिए 40 से 50 हजार रुपये तक लिए जाने की चर्चा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। बताया जाता है कि परियोजना कार्यालय में परियोजना अधिकारी, सहायक ग्रेड-1 लिपिक, चपरासी सहित वाहन चालक की उपस्थिति रहती है। ऐसे में कार्यालयीन कार्यों के लिए देर रात तक कार्यालय खोले जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
शासकीय वाहन के इस्तेमाल पर भी सवाल
सूत्रों से यह जानकारी भी सामने आई है कि महिला अधिकारी द्वारा शासकीय वाहन स्वयं चलाए जाने की बात कही जा रही है। यहां तक कि बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस वाहन चलाने का दावा भी किया जा रहा है। हालांकि इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। यदि ऐसा पाया जाता है तो मामले की जांच आवश्यक होगी।
निजी भवन के किराये पर हर माह हजारों रुपये खर्च
परियोजना कार्यालय के लिए निजी भवन का उपयोग किए जाने की बात भी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार भवन का किराया लगभग 28 हजार रुपये प्रतिमाह है। जबकि जिला मुख्यालय में कई शासकीय भवन खाली अथवा अनुपयोगी पड़े होने की चर्चा है। ऐसे में निजी भवन के किराये पर सरकारी राशि खर्च किए जाने को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है कि विभाग द्वारा उपलब्ध शासकीय भवनों का उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा।
रात 8:03 बजे शिकायत, जांच का इंतजार
बताया गया है कि नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित शिकायत को लेकर बीते दिनों लगभग रात 8:03 बजे कलेक्टर कोरिया एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के संबंधित अधिकारी को शिकायत की गई थी। अब देखना होगा कि शिकायत और देर रात कार्यालय संचालन के मामले में प्रशासन क्या कार्रवाई करता है। इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। यदि प्रशासन निष्पक्ष जांच कराता है तो देर रात कार्यालय संचालन, नियुक्ति प्रक्रिया, शासकीय वाहन के उपयोग तथा निजी भवन के किराये से जुड़े तथ्यों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। नियुक्ति में किसी भी प्रकार के लेन-देन का आरोप गंभीर है, इसलिए संबंधित अभिलेखों और शिकायतों की जांच जरूरी है।





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