एसडीएम डॉ. उमेश पटेल के कार्यकाल में लंबित राजस्व मामलों के निराकरण पर जोर
बैकुण्ठपुर। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बैकुण्ठपुर के पद पर कार्यरत रहे डॉ. उमेश पटेल के कार्यकाल को राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए याद किया जा रहा है। उनके कार्यकाल के दौरान कार्यालय में आने वाले आवेदकों से शालीनता से मुलाकात करने तथा उनकी समस्याओं को सुनकर नियमानुसार कार्रवाई करने की कार्यशैली चर्चा में रही।
बताया जाता है कि डॉ. उमेश पटेल नियमित रूप से कार्यालयीन समय में उपस्थित रहकर राजस्व प्रकरणों की सुनवाई करते थे। विशेष रूप से ऐसे विवादित मामलों, जो छोटी-छोटी आपत्तियों अथवा प्रक्रियात्मक कारणों से लंबे समय से लंबित थे, उनकी सुनवाई अपने समक्ष कर निराकरण करने पर जोर दिया गया। मुआवजा प्रकरणों में भी उनके स्तर से लंबित मामलों की सुनवाई कर संबंधित पक्षों को राहत देने की दिशा में कार्रवाई की गई। वहीं वसीयत से जुड़े कुछ मामलों में भी अपेक्षाकृत कम समय में आदेश पारित किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि प्रत्येक प्रकरण का निराकरण संबंधित दस्तावेजों, पक्षकारों के जवाब और राजस्व नियमों के आधार पर किया जाता है। ग्राम अमहर से जुड़ा वसीयत संबंधी एक प्रकरण भी इस दौरान चर्चा में रहा। यह मामला पटना तहसील से स्थानांतरित होकर बैकुण्ठपुर एसडीएम न्यायालय पहुंचा था और उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब दो माह में इसका निराकरण किया गया। इसके बाद मामले में आगे अपील की कार्रवाई भी हुई, जिसमें अपर कलेक्टर द्वारा 29 सितंबर 2026 को संबंधित भूमि के क्रय-विक्रय एवं हस्तांतरण पर रोक लगाते हुए स्थगन आदेश जारी किया गया। डॉ. उमेश पटेल के कार्यकाल की विशेषता के रूप में आवेदकों की सुनवाई, लंबित प्रकरणों पर ध्यान और विवादित मामलों को प्रक्रिया के तहत शीघ्र निपटाने की कार्यशैली को देखा गया। उनके स्थानांतरण के बाद अब राजस्व कार्यालय में लंबित पुराने मामलों के निराकरण की गति बनाए रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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