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पृथ्वी दिवस पर कराह रही गेज नदी, शहर की जीवनदायिनी खुद मांग रही जीवनदान


बैकुण्ठपुर। एक ओर आज पूरे देश में पृथ्वी दिवस मनाकर पर्यावरण संरक्षण और जल स्रोतों को बचाने का संदेश दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर की जीवनदायिनी कही जाने वाली गेज नदी अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करती नजर आ रही है। नगर पालिका क्षेत्र का कचरा और प्लास्टिक पन्नियां प्रतिदिन नदी किनारे फेंकी जा रही हैं, जिससे नदी का जल स्तर लगातार घटता जा रहा है और प्रदूषण बढ़ता जा रहा है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि गेज नदी वर्षों से शहर की प्यास बुझाने का प्रमुख स्रोत रही है, लेकिन वर्तमान में इसकी हालत चिंताजनक हो गई है। नदी किनारे फैली गंदगी और कचरे के ढेर न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि आने वाले समय में जल संकट की आशंका भी बढ़ा रहे हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, हर वर्ष खुटहनपारा क्षेत्र में लाखों रुपये खर्च कर नदी की सफाई कराई जाती है, लेकिन जहां वास्तव में सफाई और संरक्षण की जरूरत है, वहां कार्य नहीं हो पा रहा है। यह स्थिति प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करती है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो गेज नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
वहीं जिला प्रशासन द्वारा “आवा पानी झोकी” अभियान के तहत जल संरक्षण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। नगर पालिका क्षेत्र में पुराने और सूख चुके कुओं का मरम्मत कार्य कराया जा रहा है, जो सराहनीय पहल है। लेकिन यह भी एक विडंबना है कि जहां एक ओर छोटे जल स्रोतों को पुनर्जीवित किया जा रहा है, वहीं शहर की मुख्य जलधारा गेज नदी उपेक्षा का शिकार बनी हुई है।
बताया जाता है कि जुलाई 2025 में नगर पालिका को कचरा बड़गांव में डंप करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन एक वर्ष बीतने के बाद भी इसका पालन नहीं हो सका है। वर्तमान में तलवापारा क्षेत्र में गेज नदी के किनारे ही कचरा फेंका जा रहा है, जिससे नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है और जल प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नदी में इसी तरह कचरा डाला जाता रहा, तो न केवल जल स्तर में गिरावट आएगी बल्कि भूजल स्तर पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। आने वाले समय में शहरवासियों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
पृथ्वी दिवस के इस अवसर पर आवश्यकता है कि प्रशासन, जनप्रतिनिधि और आम नागरिक मिलकर गेज नदी के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाएं। कचरा प्रबंधन की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और नदी किनारे कचरा फेंकने पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाए। यदि अब भी ध्यान नहीं दिया गया, तो वह दिन दूर नहीं जब शहर की जीवनदायिनी गेज नदी केवल एक याद बनकर रह जाएगी।


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