कोरिया। जिले के राजस्व विभाग में इन दिनों पटवारियों के संभावित तबादलों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सूत्रों के अनुसार, जिले में बड़े पैमाने पर पटवारियों की तबादला सूची तैयार की जा रही है, जिसे लेकर विभागीय हलकों में हलचल बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि कई पटवारी मुख्यालय, विशेषकर बैकुण्ठपुर तहसील क्षेत्र में पदस्थापना पाने के लिए प्रयासरत हैं। जानकारी यह भी सामने आ रही है कि कुछ पटवारियों के खिलाफ गंभीर मामलों में जांच चल रही है, बावजूद इसके वे भी मुख्यालय में पदस्थ होने के लिए सक्रिय हैं। इस स्थिति ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन कर्मचारियों पर जांच लंबित है, उन्हें प्राथमिकता देने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
सूत्रों की मानें तो बैकुण्ठपुर तहसील क्षेत्र में इन दिनों शासकीय भूमि से जुड़े मामलों में गतिविधियां बढ़ी हैं। भूमि की खरीद-फरोख्त को लेकर कई शिकायतें भी सामने आई हैं, लेकिन इन पर अपेक्षित स्तर पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इससे आमजन में असंतोष का माहौल देखा जा रहा है। लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद न तो ठोस जांच हो रही है और न ही जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा गंभीरता दिखाई जा रही है। इसी बीच यह भी चर्चा है कि जिस तरह पड़ोसी जिला सूरजपुर में हाल ही में राजस्व विभाग में बड़े स्तर पर तबादले किए गए थे, उसी तर्ज पर कोरिया जिले में भी व्यापक फेरबदल की तैयारी चल रही है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विभागीय सूत्रों के हवाले से यह जानकारी लगातार सामने आ रही है। एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह भी सामने आया है कि राजस्व विभाग के कुछ अन्य कर्मचारी भी प्रशासन की निगरानी में हैं और उनके खिलाफ भी कभी भी कार्रवाई हो सकती है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि आने वाले समय में विभाग के भीतर व्यापक बदलाव संभव हैं। तबादलों को लेकर लेनदेन की चर्चाएं भी जोरों पर हैं, हालांकि इसकी पुष्टि आधिकारिक तौर पर नहीं हुई है। यदि इस प्रकार की गतिविधियां सही पाई जाती हैं, तो यह शासन की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर सकती हैं। अब नजर इस बात पर टिकी है कि यह संभावित तबादला सूची कब जारी होती है—सुशासन तिहार से पहले या उसके बाद। यदि यह सूची सुशासन तिहार से पहले जारी होती है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे जनसमस्या निवारण शिविरों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान में बाधा आने की आशंका भी जताई जा रही है। फिलहाल पूरे मामले पर जिला प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है, जिससे अटकलों का बाजार और गर्म हो गया है। आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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