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कोरिया जिले में पटवारियों के तबादले की फिर चर्चा तेज, क्या इस बार होगा समान रूप से स्थानांतरण?


कोरिया। जिले में एक बार फिर पटवारियों के तबादले को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। गौरतलब है कि 26 नवंबर 2024 को जिले के 26 पटवारियों का स्थानांतरण किया गया था, जिसमें सोनहत, पटना और बैकुण्ठपुर तहसील के कई पटवारी एक हल्के से दूसरे हल्के में भेजे गए थे। उस समय भी यह उम्मीद जताई गई थी कि लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारियों को हटाकर प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाएगा। लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि इस बार बनने वाली संभावित स्थानांतरण सूची में क्या उन पटवारियों के नाम शामिल होंगे, जो तीन वर्ष या उससे अधिक समय से एक ही हल्के में पदस्थ हैं, या फिर पिछली बार की तरह वे फिर से अपने स्थान पर “अंगद के पैर” की तरह जमे रहेंगे

प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो समय-समय पर कर्मचारियों का स्थानांतरण एक आवश्यक प्रक्रिया मानी जाती है। इससे न केवल कार्य प्रणाली में सुधार होता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर पनपने वाली अनियमितताओं और भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगता है। जिले के कई नागरिकों का मानना है कि यदि एक ही व्यक्ति लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहता है, तो उसके स्थानीय प्रभाव बढ़ने लगते हैं, जिससे निष्पक्ष कार्यप्रणाली प्रभावित होती है।


सिर्फ पटवारी ही नहीं, बल्कि कलेक्टर कार्यालय सहित अन्य विभागों में भी 8 से 10 वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत लिपिकों और कर्मचारियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आमजन का कहना है कि इन कर्मचारियों का भी अन्य कार्यालयों में स्थानांतरण किया जाना चाहिए, ताकि आम लोगों के कार्यों में पारदर्शिता आए और अनावश्यक देरी तथा भ्रष्टाचार की शिकायतों में कमी हो।


वहीं, शिक्षा विभाग से जुड़ा एक और मुद्दा भी चर्चा में है। हाल ही में शिक्षा विभाग से संलग्न शिक्षकों को उनके मूल विद्यालयों में वापस भेज दिया गया है, जिससे शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश की गई। लेकिन इसके विपरीत, शिक्षा विभाग के कई कर्मचारी अब भी तहसील कार्यालयों, एसडीएम कार्यालयों और जनसंपर्क विभाग में संलग्न हैं और उनकी वापसी अब तक नहीं हो पाई है। इसे लेकर “दोहरा मापदंड” अपनाए जाने के आरोप भी सामने आ रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, कुछ कर्मचारियों को एसआईआर (SIR) के नाम पर अस्थायी रूप से अन्य विभागों में संलग्न किया गया था, लेकिन वे अब तक वहीं कार्यरत हैं और इस व्यवस्था का लाभ उठा रहे हैं। इसका सीधा असर उनके मूल विभाग के कार्यों पर पड़ रहा है, जहां स्टाफ की कमी महसूस की जा रही है। इससे प्रशासनिक कार्यों की गति प्रभावित हो रही है और आम जनता को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस पूरे मामले को लेकर जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म है। कुछ लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही इस विषय पर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वे “सुशासन तिहार” के दौरान मुख्यमंत्री तक सीधे अपनी शिकायत पहुंचाएंगे। उनका मानना है कि शासन की मंशा पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन देने की है, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ विसंगतियां इस उद्देश्य को कमजोर कर रही हैं। अब सभी की निगाहें आगामी संभावित स्थानांतरण सूची पर टिकी हुई हैं। देखना यह होगा कि प्रशासन इस बार कितनी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ निर्णय लेता है, और क्या वास्तव में लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारियों को हटाकर व्यवस्था में सुधार लाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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