Ticker

6/recent/ticker-posts

अवैध कोयला खदान फिर सक्रिय, भाजपा नेताओं पर संरक्षण के आरोप

एक वर्ष पहले रोकने का दावा करने वाला संगठन अब खामोश, खनिज विभाग की भूमिका पर उठे सवाल

बैकुण्ठपुर/कोरिया। जिले में अवैध कोयला खनन और चोरी का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। जिन क्षेत्रों में पिछले वर्ष अवैध कोयला परिवहन और खदानों को बंद कराने को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए थे, वहीं अब दोबारा खुलेआम कोयला चोरी होने की चर्चा जोरों पर है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस बार भाजपा से जुड़े कुछ जमगहना व डबरीपारा के पदाधिकारी और पूर्व जनप्रतिनिधि ही इस पूरे खेल में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र के एक पूर्व उप सरपंच सहित स्थानिय नेताओ पर अवैध कोयला उत्खनन और भट्ठों में कोयला एकत्रित कराने के आरोप लग रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय ट्रैक्टर और पीकअप वाहनों के माध्यम से कोयला निकालकर अलग-अलग स्थानों पर जमा किया जा रहा है। इसके बाद उसे स्थानीय भट्ठों और बाहरी कारोबारियों तक पहुंचाया जाता है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष इसी मुद्दे को लेकर एक संगठन ने बड़े स्तर पर आंदोलन चलाया था। सोशल मीडिया में कई फोटो और वीडियो वायरल हुए थे, जिनमें अवैध कोयला परिवहन और खदानों की तस्वीरें सामने आई थीं। उस समय संगठन के पदाधिकारियों ने प्रशासन पर दबाव बनाते हुए अवैध कारोबार को पूरी तरह बंद कराने का दावा किया था। लेकिन अब वही संगठन पूरी तरह शांत नजर आ रहा है, जिससे लोगों के बीच गठबंधन और मिलीभगत की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जिन लोगों ने पहले अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठाई थी, अब उन्हीं का कोई अतापता नही है यही कारण है कि संगठन की चुप्पी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन निष्पक्ष जांच कराए तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।क्षवहीं खनिज विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। लगातार शिकायतों और चर्चाओं के बावजूद विभाग द्वारा कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई है। लोगों का कहना है कि अवैध कोयला भंडारण खुलेआम हो रहा है, फिर भी जिम्मेदार अधिकारी मौन बने हुए हैं। इससे यह संदेह और गहरा हो रहा है कि पूरे मामले में विभागीय स्तर पर भी संरक्षण मिल रहा है। क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते अवैध खनन और कोयला चोरी पर रोक नहीं लगी तो शासन को राजस्व का भारी नुकसान होने के साथ पर्यावरण को भी गंभीर क्षति पहुंचेगी। साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि पिछले वर्ष अवैध कोयला रोकने का दावा करने वाले संगठन की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके।













नोट- यह जानकारी सुनी हुई है इसकी पुष्टी हम नही करते।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ