भांडी-खांडा में जमा हो रहा कर शुल्क, बाकी ग्राम पंचायत सचिव आखिर क्यों मौन ?
बैकुण्ठपुर। मुख्य मार्गों पर अवैध होर्डिंग बोर्ड लगने और ग्राम पंचायतों को राजस्व हानि होने संबंधी समाचार के प्रमुखता से प्रकाशन के बाद आखिरकार जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी ग्राम पंचायत सचिवों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट कहा है कि पंचायत क्षेत्रों के मुख्य मार्गों पर जितने भी अवैध होर्डिंग बोर्ड लगे हैं, उन पर त्वरित कार्रवाई की जाए तथा नियमानुसार कर शुल्क वसूली सुनिश्चित की जाए।
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत भांडी और ग्राम पंचायत खांडा में लगे होर्डिंग बोर्डों का कर शुल्क नियमानुसार जमा कराया जा रहा है। वहीं अन्य कई ग्राम पंचायतों में आज तक न तो होर्डिंग का सर्वे हुआ और न ही कर वसूली की ठोस कार्रवाई दिखाई दे रही है। इससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर अन्य ग्राम पंचायत सचिव अपने उच्च अधिकारियों के निर्देशों का पालन क्यों नहीं कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो कई पंचायत क्षेत्रों में वर्षों से बड़े-बड़े विज्ञापन बोर्ड लगे हुए हैं, लेकिन उनसे पंचायतों को राजस्व प्राप्त नहीं हो रहा। पंचायतों की आय का यह एक महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है, जिससे गांवों में सड़क, नाली, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और अन्य विकास कार्य कराए जा सकते हैं। इसके बावजूद कई सचिवों की उदासीनता के कारण पंचायतों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा सभी सचिवों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जिन होर्डिंग बोर्डों का कर शुल्क जमा नहीं है, उन पर तत्काल कार्रवाई कर जप्ती की जाए तथा कार्रवाई की जानकारी कार्यालय को प्रस्तुत की जाए। इसके बाद भी कई ग्राम पंचायत सचिवों द्वारा आदेशों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या कुछ ग्राम पंचायत सचिव अपने उच्च अधिकारी के आदेशों को नजरअंदाज करना ही अपना दायित्व समझ रहे हैं? यदि जनपद पंचायत के आदेशों का पालन नहीं हो रहा तो ऐसे सचिवों पर विभागीय कार्रवाई कब होगी? ग्रामीणों के बीच भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब भांडी और खांडा पंचायत कर वसूली कर सकती हैं तो अन्य पंचायतें क्यों नहीं। गौरतलब है कि अवैध होर्डिंग केवल राजस्व हानि का कारण नहीं बनते, बल्कि सड़क सुरक्षा और सरकारी नियमों की अनदेखी का भी बड़ा उदाहरण हैं। पंचायत क्षेत्रों में बिना अनुमति लगाए गए बोर्ड प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करते हैं। अब देखना यह होगा कि जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी केवल निर्देश जारी कर सीमित रहते हैं या आदेशों की अवहेलना करने वाले ग्राम पंचायत सचिवों पर कठोर कार्रवाई भी करते हैं। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो पंचायतों को होने वाला आर्थिक नुकसान लगातार बढ़ता जाएगा और शासन की मंशा पर भी प्रश्नचिन्ह खड़े होंगे।

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