खांडा में शगुन गार्डन के पास सरकारी जमीन को लेकर ग्रामीणों में सवाल, राजस्व जांच की मांग
बैकुण्ठपुर। कोरिया जिले के बैकुण्ठपुर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत खांडा में मुख्य मार्ग किनारे शासकीय भूमि के उपयोग और कथित कब्जे को लेकर ग्रामीणों के बीच चर्चा तेज है। ग्रामीणों के अनुसार मुख्य सड़क के किनारे स्थित शगुन गार्डन के बगल से शासकीय सड़क एवं भूमि का हिस्सा है। बताया जाता है कि कुछ समय पहले यहां पौधे लगाए गए थे। पौधे बड़े होने के बाद संबंधित भूमि के हिस्से को घेर लिए जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि भूमि की वास्तविक स्थिति, सीमांकन और स्वामित्व संबंधी तथ्यों की पुष्टि राजस्व विभाग के अभिलेख एवं स्थल निरीक्षण के बाद ही हो सकेगी। ग्रामीणों का यह भी दावा है कि शगुन गार्डन के भवन के निर्माण में भी शासकीय भूमि शामिल होने की आशंका को लेकर पूर्व में ग्रामीणों और कुछ जनप्रतिनिधियों ने आपत्ति जताई थी। ग्रामीणों के मुताबिक बाद में गार्डन में एक आयोजन हुआ, जिसमें कुछ ऐसे लोग भी शामिल हुए जो पहले कथित कब्जे का विरोध कर रहे थे। इसके बाद इस मुद्दे पर विरोध की गतिविधियां कम हो गईं। ग्रामीण इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। हालांकि किसी प्रकार के लेन-देन या प्रभाव डालने की बात की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
राजस्व रिकॉर्ड और सीमांकन से सामने आ सकती है स्थिति
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शासकीय भूमि पर कब्जे की शिकायत है तो राजस्व विभाग द्वारा मौके का सीमांकन कराकर बी-1, खसरा एवं नक्शे के रिकॉर्ड से वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। इससे यह भी पता चलेगा कि गार्डन का निर्माण निर्धारित निजी भूमि पर है या इसमें किसी शासकीय भूमि का हिस्सा शामिल है। इसी बीच जिले में शासकीय एवं विवादित भूमि से जुड़े मामलों को लेकर भी चर्चाएं होती रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ मामलों में सरकारी भूमि के रिकॉर्ड में नामांतरण, हस्तांतरणीय-अहस्तांतरणीय स्थिति और कब्जे से संबंधित प्रक्रियाओं में अनियमितता की आशंका रहती है। इन आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और विभागीय जांच के बाद ही संभव है। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि विवादित अथवा शासकीय भूमि से जुड़े मामलों में निजी स्तर पर धनराशि के लेन-देन की चर्चाएं रहती हैं। हालांकि इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और किसी अधिकारी या व्यक्ति के विरुद्ध आरोप को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
आदिवासी भूमि और व्यपवर्तन मामलों पर भी सवाल
ग्रामीणों के बीच अनुसूचित जनजाति की भूमि के अंतरण से जुड़े धारा 170(ख) के प्रकरणों तथा व्यपवर्तन मामलों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि ऐसे मामलों में नियमों के अनुरूप दस्तावेजों की जांच, सक्षम अधिकारी की अनुमति और भूमि की वास्तविक स्थिति का परीक्षण किया जाए। खांडा के ग्रामीणों का कहना है कि शगुन गार्डन के पास स्थित भूमि का निष्पक्ष सीमांकन और राजस्व अभिलेखों की जांच कराई जाए। यदि शासकीय भूमि पर अतिक्रमण पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई हो और यदि आरोप निराधार हों तो रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति सार्वजनिक की जाए। इससे लंबे समय से चल रही चर्चाओं पर भी विराम लग सकेगा।


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