कोरिया। जिले में इन दिनों भूमि से जुड़े मामलों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। विभिन्न क्षेत्रों से मिल रही जानकारियों के अनुसार रजिस्ट्री प्रक्रिया और राजस्व रिकॉर्ड से संबंधित कार्यों में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं। विशेष रूप से रजिस्टार कार्यालय और दस्तावेज लेखकों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
सूत्रों के मुताबिक कुछ स्थानों पर शासकीय भूमि की रजिस्ट्री और आदिवासी भूमि के हस्तांतरण को लेकर भी आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। बैकुण्ठपुर तहसील अंतर्गत ग्राम मजगवां में आदिवासी भूमि के नियम विरुद्ध विक्रय की शिकायत अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के समक्ष लिखित रूप से प्रस्तुत की गई है। संबंधित अधिकारियों द्वारा मामले की जांच की प्रक्रिया जारी होने की जानकारी सामने आ रही है।
इधर, यह भी चर्चा है कि राजस्व विभाग में कई कर्मचारी लंबे समय से एक ही हल्के में पदस्थ हैं, जिससे पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर प्रश्न उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह मांग तेज हो रही है कि तीन वर्षों से अधिक समय से जमे कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जाए, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार हो सके।
सूत्रों के अनुसार, इन मामलों को लेकर एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की नजर भी जिले पर बनी हुई है। हालांकि एसीबी की ओर से किसी प्रकार की आधिकारिक कार्रवाई या जांच की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन विभागीय गतिविधियों पर निगरानी की चर्चाएं जरूर सामने आ रही हैं।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाती है, तो संभावित विवादों और बड़े मामलों से बचा जा सकता है। वहीं, जिला प्रशासन के लिए यह एक अवसर भी है कि वह पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करते हुए जनता का विश्वास कायम रखे।
फिलहाल, सभी आरोप और चर्चाएं जांच के दायरे में हैं। आधिकारिक पुष्टि और ठोस साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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