तलवापारा पंचायत बैठक में विकास, अवैध होर्डिंग व गेज नदी संरक्षण पर हुई चर्चा
बैकुण्ठपुर। कोरिया जिला मुख्यालय से लगे ग्राम पंचायत तलवापारा में हाल ही में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें ग्राम विकास, अवैध होर्डिंग बोर्डों से राजस्व वसूली और गेज नदी के घटते जलस्तर जैसे गंभीर मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता सरपंच देवी दयाल सिंह ने की, जबकि सचिव रामभजन तिग्गा सहित कई ग्रामीण व जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान ग्राम पंचायत सरपंच देवी दयाल व सचिव राम भजन दिग्गा ने ग्राम पंचायत क्षेत्र में मुख्य सड़कों के किनारे लगे अवैध होर्डिंग बोर्डों का मुद्दा उठाया। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे होर्डिंग्स से नियमानुसार शुल्क वसूला जाना चाहिए, जिससे पंचायत की आय में वृद्धि हो सके। इस प्रस्ताव का समर्थन बैठक में मौजूद महेंद्र पनिका, पंच पति देव नारायण, दिपक साहू, महेन्द्र व अन्य ग्रामीणों ने भी किया। इस पर सचिव रामभजन तिग्गा ने बताया कि उच्च अधिकारियों को लिखित आवेदन भेजकर मार्गदर्शन मांगा गया है, ताकि नियमों के अनुरूप कार्रवाई की जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि जिले के अन्य ग्राम पंचायतों की तरह तलवापारा में भी होर्डिंग से राजस्व वसूली की प्रक्रिया लागू की जाएगी। बैठक में एक और गंभीर विषय गेज नदी के घटते जलस्तर को लेकर सामने आया। ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त की कि यह नदी जिला मुख्यालय के लिए जीवनदायिनी है, लेकिन नगर पालिका द्वारा शहर का कचरा इसमें या इसके आसपास फेंके जाने से जलस्तर और जल गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रहे हैं। बताया गया कि कलेक्टर कोरिया द्वारा 15 जुलाई 2025 को ग्राम पंचायत बड़गांव में कचरा निस्तारण के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए थे। उक्त निर्देश के तहत स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के अंतर्गत सैनिटरी लैंडफिल (एसएलएफ) सेंटर स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया था। तहसीलदार बैकुण्ठपुर द्वारा ग्राम पंचायत बड़गांव के खसरा नंबर 735 (0.87 हेक्टेयर) और 744 (0.97 हेक्टेयर) में से 0.13 हेक्टेयर भूमि इस कार्य के लिए प्रस्तावित की गई थी। योजना के अनुसार, एसएलएफ सेंटर बन जाने के बाद तलवापारा क्षेत्र में कचरा फेंकना पूरी तरह बंद कर दिया जाना था। हालांकि, प्रस्ताव के करीब नौ माह बीत जाने के बाद भी अब तक एसएलएफ सेंटर का निर्माण शुरू नहीं हो सका है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है। बैठक में यह भी सवाल उठाया गया कि नगर पालिका द्वारा करोड़ों रुपये के अन्य निर्माण कार्य और डीएमएफ मद से विकास कार्य किए जा रहे हैं, लेकिन गेज नदी के संरक्षण और स्वच्छता की दिशा में ठोस पहल नहीं की जा रही है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि जहां एक ओर पुराने कुओं का जीर्णोद्धार किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर जिले की प्रमुख जलस्रोत गेज नदी की अनदेखी की जा रही है, जो भविष्य में गंभीर जल संकट का कारण बन सकती है। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इन सभी मुद्दों को लेकर जल्द ही उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा और समाधान की मांग की जाएगी। इस बैठक ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि ग्राम स्तर पर जागरूकता बढ़ रही है और लोग अपने अधिकारों के साथ-साथ संसाधनों के संरक्षण को लेकर भी सजग हो रहे हैं।


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