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आदिवासी जमीन की खरीद-फरोख्त में गड़बड़ी, जांच की मांग तेज


बैकुंठपुर। कोरिया जिले के बैकुंठपुर स्थित रजिस्ट्रार कार्यालय एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। नरसिंहपुर के खसरा नंबर 19 की भूमि की रजिस्ट्री को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। मामला आदिवासी भूमि से जुड़ा होने के कारण और भी संवेदनशील हो गया है, क्योंकि छत्तीसगढ़ में नियमानुसार आदिवासी वर्ग की भूमि केवल उसी वर्ग के व्यक्ति को ही हस्तांतरित की जा सकती है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नरसिंहपुर निवासी राजेश कुमार सिंह (पिता सुंदर सिंह), जिनकी जाति गोंड बताई गई है, की भूमि को मनोज सूर्यवंशी (पिता राजकुमार सूर्यवंशी) के नाम रजिस्ट्री कर दी गई। आरोप है कि इस प्रक्रिया में खरीदार की जाति को भी गोंड दर्शाया गया, जबकि इस पर संदेह जताया जा रहा है। स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ता का कहना है कि यह पूरी रजिस्ट्री दस्तावेज लेखक और रजिस्ट्रार कार्यालय की मिलीभगत से की गई है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा केवल एक पक्ष का जाति प्रमाण पत्र लिया गया, जबकि दूसरे पक्ष का प्रमाण पत्र नहीं लिया गया। यह प्रक्रिया नियमों के विपरीत मानी जा रही है और इससे पूरे लेन-देन की वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि सही तरीके से दस्तावेजों की जांच होती, तो यह रजिस्ट्री संभव ही नहीं थी।

इस मामले में भूमाफियाओं की सक्रियता भी सामने आई है। आरोप है कि पिछले कुछ समय से क्षेत्र में शासकीय एवं निजी भूमि की संदिग्ध रजिस्ट्रियां लगातार हो रही हैं, जिसमें रजिस्ट्रार कार्यालय और दस्तावेज लेखकों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।

शिकायतकर्ता द्वारा इस मामले की लिखित शिकायत बैकुंठपुर में की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस जांच या कार्रवाई नहीं हुई है। इससे नाराज होकर शिकायतकर्ता ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो मामले को मुख्यमंत्री तक ले जाया जाएगा। साथ ही 1 मई से 10 मई 2026 तक चलने वाले सुशासन दिवस के दौरान भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि समय रहते इस तरह के मामलों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आदिवासी भूमि की सुरक्षा पर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस संवेदनशील मामले में क्या कदम उठाता है और दोषियों पर कब तक कार्रवाई होती है।

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