बैकुण्ठपुर। कलेक्टर रोक्तिमा यादव की अध्यक्षता में आयोजित नार्को कोऑर्डिनेशन सेंटर (नकॉर्ड) समिति की बैठक में जिले को नशामुक्त बनाने के लिए कड़े कदम उठाने पर जोर दिया गया। बैठक में मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध बिक्री तथा युवाओं में बढ़ते नशे के प्रभाव को रोकने के लिए विभिन्न विभागों की कार्ययोजनाओं की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नशा उन्मूलन प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में केवल खानापूर्ति नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
बैठक में कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्कूलों और कॉलेजों में नियमित जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर युवाओं को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराया जाए। साथ ही अवैध रूप से नशे का कारोबार करने वाले लोगों पर कड़ी निगरानी रखते हुए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। वन विभाग को अफीम और भांग जैसी मादक फसलों की संभावित अवैध खेती पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए गए। वनमंडलाधिकारी प्रभाकर खलको ने बताया कि बीटगार्डों को जंगल क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी और तत्काल सूचना देने के निर्देश जारी किए गए हैं। कलेक्टर ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेशा चौबे को विशेष अभियान चलाकर गांजा, अवैध शराब और अन्य प्रतिबंधित नशीले पदार्थों की बिक्री तथा तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। वहीं खाद्य एवं औषधि प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग को बिना चिकित्सकीय पर्ची के नशीली दवाओं की बिक्री रोकने और नशा पीड़ितों के उपचार व परामर्श सेवाओं को मजबूत करने के लिए कहा गया। समाज कल्याण विभाग और नगरीय निकायों को भी जनजागरूकता अभियान चलाने तथा बच्चों और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए गए। हालांकि प्रशासनिक बैठकों में लगातार निर्देश जारी होने के बावजूद जिले के कई क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर स्थिति अलग दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भंडारपारा, सलका, मजगवां, आमापारा, आनी, आमगांव तथा जामपारा सहित कई क्षेत्रों में खुलेआम गांजा और कच्ची शराब का अवैध कारोबार संचालित हो रहा है। बताया जाता है कि कुछ स्थान तो ऐसे हैं जो संबंधित थाना क्षेत्र से महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर स्थित हैं, फिर भी अवैध गतिविधियां लंबे समय से जारी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद स्थायी और प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती, जिससे अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद बने हुए हैं। नशे की आसान उपलब्धता का सबसे अधिक दुष्प्रभाव युवाओं पर पड़ रहा है, जिससे सामाजिक और पारिवारिक समस्याएं भी बढ़ रही हैं। लोगों का मानना है कि यदि नकॉर्ड बैठक में दिए गए निर्देशों का वास्तविक क्रियान्वयन किया जाए और लगातार निगरानी रखी जाए तो जिले में नशे के नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है। बैठक के अंत में कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने तथा समाज की भागीदारी बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने समाज प्रमुखों, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने की अपील करते हुए कहा कि प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ सामाजिक सहयोग से ही जिले को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। वहीं अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि बैठक में दिए गए निर्देश जमीनी स्तर पर कितने प्रभावी साबित होते हैं और अवैध नशे के कारोबार पर कब तक ठोस कार्रवाई दिखाई देती है।

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