कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक पटवारी का किसान से रिश्वत लेते वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के पसान तहसील अंतर्गत पिपरिया हल्के के पटवारी विनोद अग्रवाल को एसडीएम मनोज कुमार बंजारे ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। बताया जा रहा है कि पटवारी ने जमीन का वन पट्टा ऑनलाइन करने के लिए 5 हजार रुपये तथा फौती नामांतरण के लिए 10 हजार रुपये की मांग की थी। परेशान किसान ने रिश्वत देते समय पटवारी का वीडियो बना लिया, जिसमें वह टेबल के नीचे नोट गिनते दिखाई दे रहा है। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रशासन हरकत में आया और कार्रवाई की गई।
इधर, कोरिया जिले में भी राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों और किसानों का आरोप है कि सीमांकन, बंटवारा, फौती नामांतरण और किसान किताब जैसे सामान्य कार्यों के लिए महीनों तक तहसील और पटवारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई आवेदकों का कहना है कि बिना रिश्वत दिए कोई काम समय पर नहीं होता। जानकारी के अनुसार, किसान किताब बनवाने के लिए 10 से 15 हजार रुपये तक की मांग की जा रही है, वहीं सीमांकन कार्य के लिए भी हजारों रुपये लिए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें जनदर्शन का सहारा लेना पड़ रहा है। जनदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शिकायत कर रहे हैं कि उनका सीमांकन नहीं हो रहा, बंटवारा लंबित है या किसान किताब जारी नहीं की जा रही। कुछ शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जनदर्शन में शिकायत करने के बाद संबंधित कर्मचारियों द्वारा आवेदकों पर अनावश्यक दबाव बनाया जाता है। कई लोगों से आवेदन वापस लेने या लिखित में यह देने के लिए कहा जाता है कि उनका कार्य पूरा हो चुका है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि कई पटवारी गांवों में कम और तहसील कार्यालयों में अधिक समय बिता रहे हैं। वहीं अधिकारियों पर संलग्न कर्मचारियों को बढ़ावा देने के आरोप भी लग रहे हैं, जबकि जिले में राजस्व कर्मचारियों की कमी नहीं है। गौरतलब है कि कुछ समय पहले जिले में एसीबी टीम के सक्रिय होने की चर्चा के बाद रिश्वतखोरी पर कुछ दिनों तक अंकुश लगा था, लेकिन अब फिर पुराने हालात लौटते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या कोरिया जिले में भी भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई होगी, जिससे रिश्वतखोरी पर लगाम लग सके।

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