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सरगुजा में विधायक–तहसीलदार विवाद पर बढ़ा बवाल, गिरफ्तारी की मांग तेज


सरगुजा। सरगुजा जिले में विधायक और तहसीलदार के बीच हुए विवाद ने अब बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक रूप ले लिया है। राजस्व निरीक्षक संघ और राजस्व कर्मचारियों ने संबंधित विधायक की गिरफ्तारी की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो राजस्व कार्य बंद कर हड़ताल की जाएगी। पूरे मामले ने भाजपा शासन और प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सूत्रों के अनुसार, विवाद के बाद राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि किसी आम नागरिक पर शासकीय कर्मचारी से दुर्व्यवहार या हमला करने का आरोप लगता, तो पुलिस तत्काल गिरफ्तारी कर लेती, लेकिन सत्ता पक्ष से जुड़े जनप्रतिनिधियों के मामलों में कार्रवाई धीमी दिखाई देती है। इसी बात को लेकर विभागीय कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। राजस्व विभाग को प्रशासन की “रीढ़” माना जाता है। गांव से लेकर शहर तक जमीन, सीमांकन, नामांतरण और राजस्व संबंधी अधिकांश कार्य इसी विभाग के माध्यम से संचालित होते हैं। ऐसे में यदि राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ कथित अभद्रता या दबाव की घटनाएं बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे आम जनता पर पड़ सकता है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ पर ही दबाव बनाया जाएगा, तो आम लोगों को न्याय और सुविधा मिलना कठिन हो जाएगा। वहीं सूत्रों के अनुसार, कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी है कि सच बोलने वालों पर तत्काल एफआईआर दर्ज हो जाती है, लेकिन सत्ता से जुड़े लोगों पर कार्रवाई करने में प्रशासन और पुलिस सतर्क रवैया अपनाते हैं। राजनीतिक गलियारों में इस पूरे विवाद की तुलना दिल्ली के चर्चित मामलों से भी की जा रही है, जहां बड़े पदों पर बैठे नेताओं तक के खिलाफ जांच और गिरफ्तारी की कार्रवाई हुई थी। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि कानून सबके लिए समान है, तो जनप्रतिनिधियों के मामलों में भी निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए। राजस्व कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांग पूरी तरह न्यायसंगत है और कानून का पालन बिना भेदभाव होना चाहिए। सूत्रों के अनुसार, कर्मचारियों के बीच यह आशंका भी जताई जा रही है कि प्रदेश और केंद्र में एक ही दल की सरकार होने के कारण पुलिस पर राजनीतिक दबाव रह सकता है। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। फिलहाल पूरे मामले पर प्रदेशभर के राजस्व कर्मचारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की नजर बनी हुई है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो आने वाले दिनों में यह विवाद बड़ा आंदोलन बन सकता है और राजस्व कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं।

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