कोरिया। बैकुण्ठपुर क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से चल रहा निर्माण कार्य तत्काल बंद कराया गया। जानकारी के अनुसार, जैसे ही जिला प्रशासन को प्लाटिंग में हो रहे निर्माण की सूचना मिली, मौके पर राजस्व टीम भेजी गई और कार्य को रोकते हुए पंचनामा तैयार किया गया।
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि एक वन विभाग का कर्मचारी और एक पुलिस कर्मचारी बिना किसी वैध अनुमति के अपने पद का प्रभाव दिखाते हुए निर्माण कार्य करा रहे थे। प्रशासन के पहुंचते ही दोनों कर्मचारी पूरी तरह से बैकफुट पर नजर आए और कार्रवाई के सामने नतमस्तक हो गए। मामले में एक और गंभीर पहलू यह भी उजागर हुआ है कि दोनों कर्मचारियों पर कीमती शीशम की लकड़ी कटवाकर बेचने का आरोप है। बताया जा रहा है कि लगभग दस हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटाई कर उन्हें एक व्यक्ति, जिसे स्थानीय रूप से “शर्मा” के नाम से जाना जाता है, को बेच दिया गया। उक्त व्यक्ति के खिलाफ पहले भी कई शिकायतें सामने आ चुकी हैं।
सूत्रों के मुताबिक, शर्मा का नाम इससे पहले भी प्रेमाबाग में लिप्टिस (यूकेलिप्टस) पेड़ों की कटाई, विश्राम गृह परिसर के पेड़ों को नुकसान पहुंचाने और बावसपारा में राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे पेड़ काटने जैसी घटनाओं में जुड़ चुका है। एक मामले में पेड़ गिरकर एक व्यक्ति के घर में जा गिरा था, जिसे बाद में आपसी समझौते के जरिए दबा दिया गया।
स्थानीय लोगों का यह भी दावा है कि इसी शर्मा के माध्यम से वन और पुलिस कर्मचारियों द्वारा काटी गई लकड़ी की खरीद-फरोख्त की गई है। घटना के सामने आने के बाद दोनों कर्मचारी फिलहाल भूमिगत बताए जा रहे हैं।
इस पूरे मामले को और गंभीर तब माना जा रहा है जब यह जानकारी सामने आई कि दोनों कर्मचारियों का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वे रात के समय लकड़ी चोरी करते नजर आ रहे थे। हालांकि, इस वीडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। फिलहाल प्रशासन द्वारा मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही जा रही है। क्षेत्र में इस घटना को लेकर लोगों में आक्रोश है और पारदर्शी जांच की मांग तेज हो गई है।


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