कोरिया जिले में कूप निर्माण कार्यों पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने लगाया मिलीभगत और अनियमितता का आरोप
बैकुण्ठपुर। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) का उद्देश्य “हर खेत को पानी” और “प्रति बूंद अधिक फसल” के माध्यम से किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है, लेकिन कोरिया जिले में यही योजना अब सवालों के घेरे में आ गई है। जिले के बैकुंठपुर जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत रटगा के डोंगरीपारा में चल रहे कूप निर्माण कार्यों में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिससे भविष्य में किसानों को लाभ की बजाय नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ग्रामीणों के अनुसार डोंगरीपारा में लगभग 2.99 लाख रुपये की लागत से बनाए जा रहे कूप निर्माण में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की जा रही है। निर्माण में लाल ईंट और स्थानीय पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है, जबकि योजना के तहत मजबूत और टिकाऊ निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य जल्दबाजी और खानापूर्ति के तौर पर कराया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि योजना के अधिकांश कार्य एक ही व्यक्ति द्वारा कराए जा रहे हैं। इससे यह संदेह गहरा रहा है कि पूरी योजना में ठेकेदारी प्रथा हावी हो चुकी है, जबकि नियमों के अनुसार कार्य ग्राम स्तरीय जलग्रहण समिति के माध्यम से कराया जाना चाहिए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निजी ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों को दरकिनार किया जा रहा है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि कई निर्माण स्थलों पर सूचना पटल तक नहीं लगाए गए हैं। शासन के नियमों के अनुसार किसी भी शासकीय निर्माण कार्य में लागत, स्वीकृति और निर्माण एजेंसी की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य होता है, लेकिन अधिकांश स्थलों पर यह व्यवस्था नदारद है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार सूचना पटल लगाने की मांग की, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया।
ग्रामीणों ने कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के अधिकारियों पर भी मिलीभगत का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पूरे निर्माण कार्य में ग्राम पंचायत और सरपंच की भूमिका लगभग खत्म कर दी गई है। केवल औपचारिकता के तौर पर पांच सदस्यीय समिति बनाई गई है, जबकि वास्तविक नियंत्रण विभागीय अधिकारियों और निजी लोगों के हाथ में है। ग्रामीणों के मुताबिक सामग्री की खरीद भी विभाग द्वारा ही कराई जा रही है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।जानकारों का कहना है कि विगत दो वर्षों से जिले में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत कराए जा रहे कार्यों में लगातार अनियमितताएं सामने आ रही हैं। इससे पहले पोटेडांड ग्राम में भी ठेकेदार के माध्यम से कराए गए निर्माण कार्यों में गुणवत्ता को लेकर विवाद हुआ था। अब रटगा पंचायत में सामने आए मामले ने एक बार फिर योजना की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इन निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो आने वाले समय में कूप क्षतिग्रस्त हो सकते हैं और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसानों का कहना है कि सरकार सिंचाई सुविधा बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण योजनाओं का वास्तविक लाभ जरूरतमंद किसानों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
क्या बोले अधिकारी?
इस मामले में जब कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एवं प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के एसडीओ कमलेश सिंह से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस संबंध में जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि योजना के प्रावधानों के अनुसार ही कार्य किया जाना है और तकनीकी जानकारी के लिए इंजीनियर से बात की जा सकती है।
वहीं कार्य की इंजीनियर प्रियंका वर्मा ने पहले कहा कि वह हाल ही में कार्य स्थल पर गई थीं और उन्हें वहां लाल ईंट तथा स्थानीय पत्थर दिखाई नहीं दिए। हालांकि जब उन्हें बताया गया कि पिछले ढाई महीने से निर्माण स्थल पर यही सामग्री रखी हुई है, तो उन्होंने कहा कि यदि मौके पर ऐसी सामग्री है तो उसे हटवाया जाएगा। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में सामने आई इन अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होती है या नहीं।


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