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लगातार शिकायतों के बाद हरकत में आया प्रशासन, पशुपालन विभाग की जांच में नया मोड़


कोरिया। जिले के पशुपालन विभाग से जुड़ी शिकायतों की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय जांच दल के कोरिया पहुंचने के साथ ही मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। जांच के दौरान शिकायतकर्ताओं ने प्रतिवेदन की प्रति देखे बिना हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया, जिससे जांच प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, बैकुण्ठपुर निवासी विकास साहू द्वारा पिछले कई महीनों से पशुपालन विभाग में कथित अनियमितताओं, प्रशासनिक लापरवाही और विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर लगातार शिकायतें की जा रही हैं। विकास साहू ने जनदर्शन सहित विभिन्न प्रशासनिक मंचों पर कई बार आवेदन प्रस्तुत कर मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनकी शिकायतों पर ठोस कार्रवाई करने के बजाय संबंधित अधिकारियों द्वारा मामले को लगातार टालने का प्रयास किया गया। उनका कहना है कि पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा बार-बार उन्हें और उच्च अधिकारियों को गोल-गोल घुमाया जा रहा है, जिसके कारण शिकायतों का निराकरण लंबे समय से लंबित है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कई बार आवेदन और दस्तावेज प्रस्तुत करने के बावजूद स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया और न ही शिकायतों के संबंध में संतोषजनक कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराई गई।

लगातार मिल रही शिकायतों और मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तर पर जांच के निर्देश दिए गए, जिसके बाद पांच सदस्यीय जांच दल कोरिया पहुंचा। जांच दल ने शिकायतकर्ताओं, विभागीय अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों से चर्चा कर विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी एकत्र की। साथ ही विभागीय अभिलेखों और दस्तावेजों का भी परीक्षण किया गया। जांच के दौरान उस समय स्थिति विवादित हो गई जब शिकायतकर्ताओं से कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया। शिकायतकर्ताओं ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्हें यह नहीं बताया गया कि दस्तावेजों में क्या उल्लेख किया गया है और उनकी शिकायतों के संबंध में क्या निष्कर्ष दर्ज किए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक प्रतिवेदन या दस्तावेजों की सामग्री नहीं दिखाई जाती, तब तक वे किसी भी प्रकार के हस्ताक्षर नहीं करेंगे। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। उनका तर्क है कि यदि बिना जानकारी दिए हस्ताक्षर लिए जाते हैं तो भविष्य में तथ्यों को लेकर भ्रम और विवाद की स्थिति बन सकती है। इसलिए पहले दस्तावेजों का अवलोकन कराना और उसके बाद हस्ताक्षर लेना ही उचित प्रक्रिया है। वहीं, जांच दल द्वारा शिकायतों से संबंधित सभी पक्षों की बात सुनने और उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण करने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद विस्तृत प्रतिवेदन उच्च अधिकारियों को सौंपा जाएगा, जिसके आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी। मामले को लेकर जिले में चर्चाओं का माहौल है। शिकायतकर्ता विकास साहू ने उम्मीद जताई है कि इस बार जांच निष्पक्ष होगी और यदि किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सभी की निगाहें जांच दल की अंतिम रिपोर्ट और प्रशासन द्वारा की जाने वाली आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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