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जनदर्शन शिकायत के बाद भी नहीं रुका संलग्नीकरण! एक ही दिन मूल पद पर भेजने और तहसील में कार्य लेने के आदेश, उठे गंभीर सवाल



बैकुण्ठपुर। जिला शिक्षा अधिकारी कोरिया द्वारा जनदर्शन में प्राप्त शिकायत के आधार पर शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर वापस भेजने के लिए पत्र जारी किए जाने के बावजूद उसी दिन तहसील कार्यालय से संबंधित कर्मचारी को कार्य के लिए आदेशित किए जाने का मामला चर्चा का विषय बन गया है। इस घटनाक्रम ने विभागीय कार्यप्रणाली, संलग्नीकरण की वैधता तथा कलेक्टर जनदर्शन में प्राप्त शिकायतों के निराकरण पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारी, कोरिया द्वारा पत्र क्रमांक 3033/स्था./2026-27 दिनांक 24.06.2026 जारी कर जनदर्शन शिकायत क्रमांक 2010226000922 दिनांक 16.06.2026 के संदर्भ में तहसील कार्यालय में कार्यरत शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को तत्काल उनके मूल पदस्थ संस्था में कार्यभार ग्रहण कराने हेतु भारमुक्त करने का अनुरोध किया गया था। लेकिन इसी दिन तहसीलदार एवं चार्ज जनगणना अधिकारी, बैकुण्ठपुर द्वारा आदेश क्रमांक 474/जनगणना/2026-27 दिनांक 24.06.2026 जारी कर संबंधित कर्मचारी को तहसील कार्यालय के कार्य हेतु आदेशित किए जाने की जानकारी सामने आई है। एक ही दिन जारी हुए दोनों आदेशों ने प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता श्याम लाल का कहना है कि जब संबंधित कर्मचारी के मूल विभाग द्वारा उसे वापस भेजने की कार्रवाई की जा रही थी, तब तहसील कार्यालय द्वारा पुनः कार्य हेतु आदेश जारी करना नियमों की भावना के विपरीत प्रतीत होता है। उनका आरोप है कि जनदर्शन में शिकायत के बाद भी वास्तविक पालन नहीं किया गया और केवल कागजी कार्रवाई की गई है।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा विभिन्न आदेशों एवं निर्देशों के माध्यम से अनावश्यक संलग्नीकरण (Attachment) की व्यवस्था समाप्त करने तथा कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर कार्य करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। शासन का स्पष्ट उद्देश्य विभागीय कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखना तथा मूल संस्थाओं में कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी कर्मचारी की सेवाएं किसी अन्य कार्यालय में आवश्यक हों तो उसके लिए सक्षम प्राधिकारी से विधिवत प्रतिनियुक्ति (Deputation) अथवा नियमानुसार आदेश आवश्यक होता है। केवल मौखिक या अनौपचारिक व्यवस्था के आधार पर लंबे समय तक किसी कर्मचारी से अन्य कार्यालय में कार्य लेना प्रशासनिक विवाद का विषय बन सकता है। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि तहसील कार्यालय में नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन तथा अन्य राजस्व प्रकरण पहले से लंबित हैं, वहीं जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए आदेशित कर्मचारी से न्यायालयीन कार्य लिया जा रहा है, जो विभागीय दायित्वों के निर्धारण पर भी सवाल खड़ा करता है। मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने न्यायालय की शरण लेने की बात कही है। उनका कहना है कि यदि जनदर्शन में प्राप्त शिकायतों पर पारदर्शी एवं नियमसम्मत कार्रवाई नहीं होगी तो आम नागरिकों का प्रशासनिक व्यवस्था से विश्वास उठ सकता है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देता है और एक ही दिन जारी हुए परस्पर विरोधाभासी आदेशों की जांच कर कोई स्पष्ट निर्णय लेता है या नहीं। प्रशासनिक हलकों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

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