कागजों में स्वच्छता, जमीनी हकीकत में गेज नदी बेहाल: विश्व पर्यावरण दिवस पर उठे सवाल
बैकुण्ठपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कलेक्टर रोक्तिमा यादव के निर्देशन में कोरिया जिले की सभी 162 ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया। ग्राम सभाओं में स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा, पौधारोपण एवं प्लास्टिक मुक्त कोरिया बनाने को लेकर संकल्प दिलाए गए। वहीं 50 से अधिक अमृत सरोवर स्थलों पर सफाई अभियान, पौधारोपण और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। प्रशासन की ओर से जल स्रोतों के संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन इन दावों के बीच बैकुण्ठपुर की जीवनदायिनी गेज नदी की स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है।
एक ओर ग्राम सभाओं में नदी-नालों की सफाई, जल संरक्षण और हरियाली बढ़ाने की बातें की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर गेज नदी लगातार प्रदूषण और उपेक्षा का शिकार बनी हुई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका बैकुण्ठपुर द्वारा वर्षों से शहर का कचरा नदी किनारे और उससे जुड़े क्षेत्रों में डाला जाता रहा है, जिससे नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान आज तक नहीं हो पाया है। ग्रामीणों का कहना है कि गेज नदी केवल एक नदी नहीं, बल्कि बैकुण्ठपुर और आसपास के क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण जल स्रोत है। इसके बावजूद नदी संरक्षण को लेकर प्रशासनिक स्तर पर गंभीर पहल दिखाई नहीं देती। पर्यावरण दिवस पर जल स्रोतों की सुरक्षा के संकल्प लिए जा रहे हैं, लेकिन जिस नदी से हजारों लोगों का जीवन जुड़ा है, उसकी सुरक्षा को लेकर ठोस कार्रवाई अब तक नजर नहीं आई है। जानकारी के अनुसार नगर पालिका को वर्ष 2025 में ही वैकल्पिक कचरा निस्तारण व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए गए थे। शिकायतों और प्रशासनिक निर्देशों के बावजूद एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में गेज नदी का जलस्तर और घट सकता है तथा प्रदूषण की समस्या और गंभीर हो सकती है। वार्ड क्रमांक 2 के पार्षद द्वारा भी जनदर्शन में गेज नदी की सफाई और संरक्षण को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत को एक माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। इससे लोगों में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित कार्यक्रमों और पौधारोपण अभियानों का महत्व अपनी जगह है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब जिले के प्रमुख जल स्रोतों को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए प्रभावी कार्रवाई दिखाई दे। ग्रामीणों का कहना है कि केवल कार्यक्रम आयोजित करने और संकल्प लेने से पर्यावरण नहीं बचेगा, बल्कि शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई और जिम्मेदार संस्थाओं की जवाबदेही तय करना भी उतना ही आवश्यक है। आज आवश्यकता इस बात की है कि गेज नदी संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए, नदी किनारे कचरा फेंकने पर पूर्ण रोक लगे और जल स्रोतों को बचाने के लिए प्रशासन, नगर पालिका तथा जनप्रतिनिधि मिलकर ठोस एवं दीर्घकालिक योजना पर कार्य करें। तभी पर्यावरण संरक्षण के दावे धरातल पर सार्थक होते दिखाई देंगे।


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