बैकुण्ठपुर। ग्राम पंचायत क्षेत्र में लगे कथित अवैध होर्डिंग्स को लेकर जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर एक बार फिर विवादों में है। शिकायतकर्ता ने बताया है कि शिकायत क्रमांक 790126003996 तथा जनदर्शन शिकायत क्रमांक 2022106000824 पर कार्रवाई करते हुए जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ए. पन्ना द्वारा जिला प्रशासन को तथ्यहीन एवं भ्रामक जानकारी दी गई कि क्षेत्र में कहीं भी अवैध होर्डिंग नहीं लगे हैं, जबकि जमीनी स्थिति इसके विपरीत है। शिकायतकर्ता का कहना है कि पंचायत क्षेत्रों में आज भी बड़े-बड़े होर्डिंग स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि बिना स्थल निरीक्षण के "कहीं भी अवैध होर्डिंग नहीं है" जैसी रिपोर्ट किस आधार पर प्रस्तुत कर दी गई।
मामले को लेकर स्थानीय लोगों के बीच भी चर्चा है कि क्या जनपद पंचायत के अधिकारियों ने वास्तव में मौके का निरीक्षण किया था या केवल कार्यालय में बैठकर प्रतिवेदन तैयार कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने कटाक्ष करते हुए कहा कि "क्या एक कमरे और वातानुकूलित वाहन से नीचे उतरकर मैदानी स्थिति देखना अधिकारियों ने उचित नहीं समझा, इसलिए झूठा प्रतिवेदन प्रस्तुत कर दिया गया?"
उन्होंने कहा कि किसी भी शासकीय अधिकारी का दायित्व तथ्यों के आधार पर जांच कर सही जानकारी प्रस्तुत करना होता है। यदि जिला कलेक्टर अथवा उच्च अधिकारियों को गलत या अधूरी जानकारी भेजी जाती है तो इससे न केवल शिकायत निवारण व्यवस्था प्रभावित होती है, बल्कि प्रशासन की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लग जाता है। कानूनी जानकारों के अनुसार यदि कोई शासकीय कर्मचारी जानबूझकर गलत तथ्य प्रस्तुत करता है या भ्रामक प्रतिवेदन देता है तो यह छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के तहत कर्तव्य के प्रति लापरवाही एवं अनुशासनहीनता माना जा सकता है। वहीं छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के अंतर्गत विभागीय जांच एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। यदि किसी प्रकरण में शासकीय अभिलेखों में जानबूझकर गलत जानकारी दर्ज करने या प्रस्तुत करने के प्रमाण मिलते हैं तो परिस्थितियों के अनुसार भारतीय न्याय संहिता (BNS) एवं अन्य लागू विधिक प्रावधानों के तहत भी जांच की जा सकती है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा संबंधित स्थानों का संयुक्त भौतिक सत्यापन कराया जाए। यदि होर्डिंग बिना अनुमति लगाए गए पाए जाते हैं तो उन्हें तत्काल हटाया जाए और गलत प्रतिवेदन देने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए। उन्होंने कहा कि जनदर्शन और शिकायत पोर्टल का उद्देश्य आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान करना है, लेकिन यदि शिकायतों का निराकरण बिना जांच के किया जाएगा तो लोगों का विश्वास इन व्यवस्थाओं से उठ सकता है। अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। यदि स्थल निरीक्षण में शिकायतकर्ता के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल अवैध होर्डिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शासकीय प्रतिवेदन की सत्यता और जवाबदेही का भी विषय बन सकता है। प्रशासन की निष्पक्ष जांच ही यह तय करेगी कि वास्तविक स्थिति क्या है और जिम्मेदारी किसकी बनती है।


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